‘कोर्ट ने कहा नमाज नहीं पढ़नी है तो नहीं पढ़नी चाहिए’, दिल्ली HC के फैसले पर बोले विनोद बंसल

‘कोर्ट ने कहा नमाज नहीं पढ़नी है तो नहीं पढ़नी चाहिए’, दिल्ली HC के फैसले पर बोले विनोद बंसल


राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित रेस कोर्स मस्जिद मामले को लेकर दिल्ली होर्ट कोर्ट ने नमाजियों को मस्जिद में जाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है. अदालत के इस फैसले का विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने स्वागत किया है. कोर्ट के फैसले पर VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि सभी को कानून-प्रवर्तन संस्थाओं और कोर्ट के फैसलों का स्वागत करना चाहिए और उनका सख्ती से पालन करना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘अगर अदालत ने कहा है कि वहां नमाज नहीं पढ़ी जानी चाहिए, तो वहां नमाज नहीं पढ़ी जानी चाहिए और अगर वो गैर-कानूनी रूप से बनाया गया है तो उसे सरेंडर कर देना चाहिए. सीधी सी बात है कि वो एक हाई-सिक्योरिटी जोन है. उसमें अगर ऐसा कुछ है तो इन्हें अपने आप ही सरेंडर कर देना चाहिए.’

ऐसी चीजों को सामुदायिक मानसिकता से तय करनी चाहिए- विनोद

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने गुरुवार (29 अक्टूबर, 2026) को न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, ‘इस तरह की जो चीजें हैं, वो समुदाय को सामुदायिक मानसिकता से ही तय कर लेना चाहिए. मुझे नहीं लगता कि उन्हें इसे कोर्ट में घसीटने की जरूरत भी है.’ उन्होंने कहा, ‘अदालत में जाकर आखिरकार आप क्या करोगे? अनावश्यक रूप से सिर्फ माननीय न्यायालय का समय बर्बाद करोगे. 

मद्रास हाई कोर्ट के फैसले पर बोले विनोद बंसल

इस दौरान VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने मद्रास हाई कोर्ट के इस फैसले पर कि दूसरे धर्मों के धार्मिक निशान पहनने वाले गैर-हिंदू जो किसी देवता के प्रति अपनी श्रद्धा नहीं रखते, वे आगमिक मंदिरों के परिसर में नहीं जा सकते, को लेकर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, ‘आस्था के केंद्रों में अनास्थावान लोगों का प्रवेश न हो, हम लंबे समय से यह कहते चले आ रहे हैं और ये पिछले कुछ दशकों में ये ज्यादा तेज गति के साथ में समाज ने उसकी मांग की है.’

उन्होंने कहा, ‘हम देख रहे हैं कि पिछले कुछ दशकों में लगातार इस्लामिक जिहादी तत्वों और ईसाई मिशनरियों की तरफ से हमारे मंदिरों और हमारे देवताओं की पवित्रता को भंग करने की अलग-अलग तरह की कोशिशें की गई हैं- कभी थूक लगाकर बेचना, कभी पेशाब लगाकर बेचना या कुछ खाद्य सामग्री में मिलावट. ऐसी ही कोई है जो मंदिरों में जाकर नमाज पढ़ता है, तो कभी वे कुछ और करने लगता है और कई ऐसे भी हैं जो गले में अपने क्रॉस लटका रखा है और मंदिर चले जा रहा है. दिखाने के लिए, क्योंकि उनको पब्लिसिटी चाहिए.

विनोद बंसल ने आगे कहा, ‘जैसा कि कोर्ट ने भी सही कहा है कि मंदिर आस्था और विश्वास के केंद्र हैं, वे पर्यटन स्थल नहीं हैं और किसी को भी कभी भी टूरिस्ट के नजरिए से मंदिर जाना भी नहीं चाहिए.’

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