पीआईपी के तहत कंपनी कर्मचारियों को बताती है कि उसके काम में किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है. किन टारगेट को समय के अंदर पूरा करना होगा और उसके प्रदर्शन का मूल्यांकन किस आधार पर किया जाएगा. आमतौर पर इसकी समय सीमा 30, 60 या 90 दिनों की होती है. हालांकि कंपनी की नियुक्ति और कर्मचारियों की स्थिति के अनुसार यह समय सीमा अलग-अलग हो सकती है.

जब किसी कर्मचारी को पीआईपी पर रखा जाता है, तो कंपनी उसे एक लिखित प्लान देती है. इसमें आमतौर पर कर्मचारियों के प्रदर्शन में कहां कमी है, किन टारगेट को तय समय में पूरा करना होगा, सुधार के लिए कितना समय दिया जाएगा, प्रदर्शन को मापने के लिए किन मानकों का इस्तेमाल होगा और कर्मचारियों की मदद के लिए कंपनी कौन-कौन से संसाधन उपलब्ध करवाएगी यह सब बातें शामिल होती है.

वहीं आमतौर पर उन कर्मचारियों के लिए पीआईपी लागू किया जाता है, जो लगातार तय टारगेट पूरे नहीं कर पा रहे हो या फिर जिनके काम की क्वालिटी कम हो. पीआईपी केवल कर्मचारी के खराब प्रदर्शन के मामलों में ही इस्तेमाल किया जाता है. अगर किसी कर्मचारी का व्यवहार अनुशासनहीनता, धोखाधड़ी, उत्पीड़न या गंभीर नियम उल्लंघन से जुड़ा हो तो ऐसे मामलों में कंपनियां आमतौर पर पीआईपी के बजाय अलग अनुशासनात्मक कार्रवाई करती है.

किसी कर्मचारी को पीआईपी पर रखने से पहले मैनेजर उसकी कमियों का भी आकलन करता है. इसके बाद कर्मचारियों के लिए स्पष्ट और मापे जा सकने वाले टारगेट तय किए जाते हैं. साथ ही उसे अतिरिक्त ट्रेनिंग, रिफ्रेशर कोर्स, जरूरी संसाधन या मैनेजर का मार्गदर्शन भी दिया जा सकता है.

इस दौरान समय-समय पर समीक्षा बैठक भी होती है, जिसमें कर्मचारियों की परफॉर्मेंस देखी जाती है और जरूरत पड़ने पर उसे सुझाव दिए जाते हैं. वहीं कई कर्मचारियों के बीच पीआईपी को लेकर नेगेटिव धारणा भी बनी हुई है.

इसकी बड़ी वजह कई कंपनियों में अगर कर्मचारी तय समय के अंदर अपने प्रदर्शन में सुधार नहीं कर पाता, तो उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई या नौकरी समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. इसी वजह से कई लोग पीआईपी को नौकरी जाने की चेतावनी मानते हैं.

हालांकि जरूरी नहीं होता है कि हर पीआईपी का उद्देश्य कर्मचारियों को हटाना ही होता है. कई कंपनियां इसे कर्मचारियों को बेहतर प्रदर्शन का मौका देने के लिए भी लागू करते हैं.

वहीं अगर कर्मचारी तरह समय के अंदर अपने काम में सुधार दिखता है, टारगेट पूरे करता है और मैनेजर के सुझाव पर काम करता है तो वह सफलतापूर्वक पीआईपी से बाहर आ सकता है और अपनी नौकरी जारी रख सकता है.
Published at : 22 Jul 2026 08:35 AM (IST)






