Sound Wave Technology For Farm: खेतों में लगी फसल को मौसम, बीमारियों और कई तरह के कीटों से बचाना पड़ता है. इनमें टिड्डियों का हमला सबसे खतरनाक माना जाता है. क्योंकि इनका झुंड कुछ ही समय में हरी-भरी फसल को पूरी तरह चट कर सकता है. ऐसे में किसान हमेशा ऐसे उपायों की तलाश में रहते हैं, जिससे बिना ज्यादा रसायनों का इस्तेमाल किए फसल को सुरक्षित रखा जा सके. इसी दिशा में ध्वनि तरंग यानी साउंड वेव आधारित तकनीक पर भी काम किया जा रहा है.
इस तकनीक का मकसद खास फ्रीक्वेंसी की आवाज के जरिए टिड्डियों और कुछ अन्य कीटों के व्यवहार को प्रभावित करना है. जिससे वे खेतों से दूर रहें और फसल को नुकसान न पहुंचाएं. हालांकि यह तकनीक अभी शोध और परीक्षण के चरण में है. लेकिन आने वाले वक्त में खेती में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है.
कैसे काम करती है ध्वनि तरंग तकनीक?
ध्वनि तरंग तकनीक में खास इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगाए जाते हैं. जो तय फ्रीक्वेंसी पर अलग-अलग तरह की आवाजें निकालते हैं. माना जाता है कि यह आवाजें कुछ कीटों के व्यवहार को बदल सकती हैं. जिससे वे खेत में रुकने के बजाय वहां से दूर चले जाते हैं. इसी वजह से वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि अलग-अलग फसलों और कीटों के लिए कौन सी ध्वनि सबसे ज्यादा असर दिखाती है.
हालांकि अभी तक ऐसे ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं जो यह साबित करें कि सिर्फ ध्वनि तरंगों की मदद से बड़े टिड्डी दल को पूरी तरह रोका जा सकता है. इसलिए फिलहाल इसे कीटनाशकों की जगह लेने वाली तकनीक नहीं माना जाता बल्कि फसल बचाने के एक एक्स्ट्रा तरीके के तौर में देखा जा रहा है.
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किसानों के लिए फायदे
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसी भी तरह के जहरीले पदार्थ पर निर्भर नहीं करती. यानी मिट्टी की सेहत, हवा की क्वालिटी और फसल की प्राकृतिक बढ़त पर इसका कोई नुकसान नहीं होता. खेत वैसे के वैसे सुरक्षित रहते हैं सिर्फ कीटों का व्यवहार बदलने की कोशिश की जाती है.
इससे फसल को बचाने का तरीका ज्यादा साफ और संतुलित बनता है. दूसरा बड़ा फायदा यह है कि कीटनाशकों पर होने वाला भारी खर्च काफी हद तक कम हो सकता है. हर सीजन में स्प्रे, दवा और छिड़काव पर जो लगातार पैसा लगता है वह बोझ घटता है.
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