Paddy Procurement Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए खरीफ सीजन में धान बेचने की तैयारी शुरू हो गई है. राज्य में 12 नवंबर 2026 से धान की खरीदी शुरू होगी, जो 31 जनवरी 2027 तक चलेगी. सरकार ने इस बार 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है. नई व्यवस्था में छोटे और सीमांत किसानों को अपनी फसल बेचने का ज्यादा मौका देने की कोशिश की गई है. अगर आप भी इस सीजन में धान बेचने वाले हैं, तो टोकन, रजिस्ट्रेशन और धान में नमी से जुड़े नियम जरूर जान लें.
सरकार ने धान खरीदी केंद्रों पर छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है. इसके तहत हर दिन खरीदे जाने वाले कुल धान में से 70 फीसदी हिस्सा छोटे और सीमांत किसानों के लिए रखा जाएगा. बाकी 30 फीसदी धान बड़े किसानों से खरीदा जाएगा. इससे छोटे किसानों को अपनी उपज बेचने में आसानी होने की उम्मीद है.वहीं, धान की हेराफेरी और बिचौलियों को रोकने के लिए एक एकड़ से अधिकतम 21 क्विंटल धान खरीदने की सीमा तय की गई है. अगर किसी इलाके में राजस्व विभाग औसत पैदावार इससे कम तय करता है, तो उसी हिसाब से धान खरीदा जाएगा.
धान का भाव कितना मिलेगा?
इस साल केंद्र सरकार ने सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी 2,441 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. वहीं, ग्रेड-ए धान के लिए 2,461 रुपये प्रति क्विंटल का भाव रखा गया है. किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए पहले टोकन लेना होगा. इसके लिए तय तारीख से कम से कम सात दिन पहले आवेदन करना जरूरी है. नियम के मुताबिक, छोटे किसानों को अधिकतम दो टोकन और बड़े किसानों को तीन टोकन दिए जाएंगे. धान की खरीदी मार्कफेड के जरिए प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों में होगी. राज्य में पहले से 2,739 खरीदी केंद्र हैं. जरूरत पड़ने पर नए केंद्र भी बनाए जा सकते हैं.
एग्रीस्टैक पर रजिस्ट्रेशन जरूरी
इस बार धान बेचने के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है. खरीदी केंद्र पर किसानों को अपनी लोन पुस्तिका दिखानी होगी. जो किसान दूसरे की जमीन पर बटाई से खेती करते हैं, उन्हें जमीन मालिक का सहमति पत्र और अपनी घोषणा भी देनी होगी.
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धान में नमी ज्यादा हुई तो नहीं होगी खरीदी
सरकार ने धान में नमी की सीमा 17 फीसदी तय की है. यानी इससे ज्यादा नमी होने पर धान नहीं खरीदा जाएगा. खरीदी के दौरान किसान की पहचान के लिए अंगूठे के निशान वाली बायोमीट्रिक व्यवस्था भी रहेगी. किसान खुद या परिवार के तय सदस्य के जरिए धान बेच सकते हैं.
दूसरे राज्यों के धान पर रहेगी नजर
दूसरे राज्यों से धान लाकर छत्तीसगढ़ में बेचने की कोशिश रोकने के लिए सीमावर्ती इलाकों के 76 खरीदी केंद्रों पर अलग-अलग विभागों की संयुक्त टीमें निगरानी करेंगी. धान भरने के लिए बारदाने का इंतजाम मार्कफेड करेगा. पुराने जूट बारदाने की कीमत 25 रुपये प्रति नग तय की गई है. इसके अलावा बीज उत्पादक किसानों का फेल धान बीज 1 मार्च से 31 मई 2027 के बीच विशेष केंद्रों पर खरीदा जाएगा.
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