जीवामृत, बीजामृत और नीमास्त्र में क्या अंतर, किसका कहां होता है इस्तेमाल?

जीवामृत, बीजामृत और नीमास्त्र में क्या अंतर, किसका कहां होता है इस्तेमाल?


Natural Farming Tips: खेती में खाद और कीटनाशकों पर होने वाला खर्च कम करने के लिए कई किसान प्राकृतिक तरीकों को अपना रहे हैं. इसमें जीवामृत, बीजामृत और नीमास्त्र का इस्तेमाल भी किया जाता है. इन तीनों को गाय के गोबर, गोमूत्र और दूसरी प्राकृतिक चीजों की मदद से तैयार किया जाता है. लेकिन इनका काम अलग-अलग होता है. जीवामृत मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद करता है, बीजामृत का इस्तेमाल बुवाई से पहले बीजों पर किया जाता है और नीमास्त्र फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों से बचाने के लिए काम आता है. आइए जानते हैं कि इन तीनों का इस्तेमाल कैसे और कब किया जाता है.

जीवामृत कैसे इस्तेमाल  होता है?

जीवामृत एक तरह का प्राकृतिक घोल है, जिसे गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, दाल के आटे और पानी की मदद से तैयार किया जाता है. इसका इस्तेमाल खेत की मिट्टी को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है. इससे मिट्टी में मौजूद अच्छे सूक्ष्मजीवों को बढ़ने में मदद मिलती है. ये सूक्ष्मजीव पौधों को मिट्टी से पोषक तत्व लेने में मदद करते हैं. किसान जीवामृत को सिंचाई के पानी के साथ खेत में डालते हैं. इसका इस्तेमाल फसल की बढ़वार के दौरान भी किया जाता है. इसका सही तरीका और मात्रा फसल के हिसाब से तय करना जरूरी है.

यह भी पढ़ें : अपने फार्म हाउस पर कैसे करें नागपुर के संतरे की खेती? ऐसे बरसेगा पैसा 

बीजामृत क्या है?

बीजामृत का इस्तेमाल बीज बोने से पहले किया जाता है. इसे गाय के गोबर, गोमूत्र, चूने, मिट्टी और पानी से तैयार किया जाता है. इसका मुख्य काम बीजों को बोने से पहले उपचारित करना है. इससे बीजों को मिट्टी से होने वाली कुछ बीमारियों से बचाने में मदद मिलती है.किसान धान, गेहूं और दालों समेत कई फसलों के बीजों को बुवाई से पहले बीजामृत से उपचारित कर सकते हैं. इसके लिए बीजों पर बीजामृत लगाया जाता है. इसके बाद बीजों को छाया में सुखाकर बोया जाता है. ध्यान रखें कि बीजों के हिसाब से इसका इस्तेमाल सही तरीके से करना जरूरी है.

नीमास्त्र क्या है?

नीमास्त्र एक प्राकृतिक घोल है, जिसे नीम की पत्तियों, गाय के गोबर और गोमूत्र से तैयार किया जाता है. इसका इस्तेमाल फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है. खासकर, पौधों का रस चूसने वाले और पत्तियां खाने वाले कुछ कीड़ों के प्रकोप को कम करने में यह मददगार होता है.

जब फसल में कीड़े दिखाई देने लगें, तब नीमास्त्र का छिड़काव किया जाता है.  इसका असर कीड़े के प्रकार और उसकी संख्या पर निर्भर करता है. इसलिए छिड़काव से पहले कृषि विभाग के अधिकारियों से सही मात्रा की जानकारी लेना बेहतर है.

यह भी पढ़ें : साधारण आलू से ज्यादा पौष्टिक है ये बैंगनी आलू! 35 टन तक होगी पैदावार



Source link