<p style="text-align: justify;">अमेरिका की एक अदालत ने महात्मा गांधी के पोते स्वर्गीय कानू गांधी और उनकी पत्नी शिवा गांधी के हक में फैसला दिया है. जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़े केस में कोर्ट ने एक आदमी को आर्डर दिया है कि जमीन से अपना अवैध कब्जा हटा ले. यह आदेश सूरत के परिमल देसाई की ओर से लड़ी गई 20 महीने लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया है.</p>
<p style="text-align: justify;">महात्मा गांधी के पोते की जमीन से जुड़ा विवाद वर्जीनिया के वॉरेन काउंटी में शेनांडोआ नेशनल पार्क से सटी 30 एकड़ जमीन से जुड़ा है. इस प्रॉपर्टी को गांधी दंपति ने 1987 में खरीदा था. गुजरात में अपने जीवन के अंतिम सालों के दौरान, उन्होंने एक चैरिटेबल ट्रस्ट बनाया और अपनी संपत्ति उसे सौंप दी. अब परिमल देसाई इसके मैनेजिंग ट्रस्टी हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>परिमल देसाई ने क्या बताया?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">TOI से बात करते हुए परिमल देसाई ने बताया, "इसकी शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी नागरिक ग्रेगरी ब्लैक ने 10 जनवरी 2025 को मेरे घर पर एक कानूनी नोटिस भेजा. ब्लैक ने वर्जीनिया के एडवर्स पजेशन नियम के तहत जमीन पर अपना दावा जताया. इस नियम के अनुसार, अगर 5 शर्तें पूरी होती हैं तो कोई व्यक्ति 15 साल तक जमीन पर कब्जा रखने के बाद उसका मालिक बन सकता है. हालांकि, वह जमीन पर अपने वास्तविक कब्जे की शर्तों को साबित नहीं कर सका.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कानू गांधी और शिवा गांधी कब लौटे भारत</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कानू गांधी और शिवा गांधी 2013 में भारत लौट आए. उन्होंने अपने जीवन के अंतिम साल गुजरात में बिताए. नवंबर 2016 में सूरत में कानू गांधी का निधन हो गया. उनकी वसीयत के अनुसार, उनकी संपत्ति शिवा गांधी को मिल गई. 2018 में, शिवा गांधी ने ‘द डॉ. शिवा एंड कानू रामदास मोहनदास गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट’ की स्थापना की और अपनी वसीयत रजिस्ट्रेड कराई. 2020 में उनके निधन के बाद, वसीयत को लागू किया गया और देसाई ने मैनेजिंग ट्रस्टी के रूप में कार्यभार संभाला.</p>
<p style="text-align: justify;">देसाई ने बताया कि वह पहली बार 2024 में वर्जीनिया स्थित इस संपत्ति पर गए और 4,500 डॉलर खर्च करके वहां एक सर्वे करवाया. उन्होंने कहा, "जब मुझे वर्जीनिया की इस जमीन के बारे में पता चला तो मैं 2024 में वहां गया और सर्वे करवाया. अगर ट्रस्ट को इस जमीन के साथ कुछ भी करना था तो उसका इस पर कब्जा होना जरूरी था.</p>
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