फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने देश में शांति और व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है. हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों में दंगे व लूटपाट की कई घटनाएं सामने आईं, जिसमें 2 लोगों की मौत हुई है. एलीसी पैलेस से राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में मैक्रों ने कहा कि इस बेकाबू हिंसा को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता.
इस बीच फ्रांसीसी पुलिस ने देश भर के कई शहरों में लगभग 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया है. मैक्रों ने हिंसा के लिए कट्टर वामपंथी (far-left) कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि जो लोग दंगों में शामिल थे या जिन्होंने संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
‼️PEACEFUL PROTEST‼️ WHAT THE HELL IS WRONG WITH THESE PEOPLE?! 😡🔥 Does THIS look “MOSTLY PEACEFUL” to you?! France is BURNING. Schools torched (including the Nelson Mandela school in Nantes), town halls set ablaze or smashed in Limoges, Lille and Marseille, a tourist office razed in Lyon, streets filled with chaos, arrests in the hundreds, and scenes of pure destruction across multiple cities. It started as “school protests” and “strikes over funding.” It turned into coordinated violence driven by far-left groups (including La France Insoumise) and crowds waving foreign flags, with anti-France rhetoric in the mix. French officials themselves have pointed to far-left organisers and opportunistic criminals as the ones tearing the place apart. Yet the BBC still managed to frame the whole thing as “MOSTLY PEACEFUL.” Meanwhile, other actions get instantly labelled terrorism. The double standard is breathtaking. This isn’t journalism. This is narrative protection while cities burn. Defund them. Now. 🇫🇷💥 #France #BBC #Riots #MediaBias https://t.co/F9aQso5V82
— DAILY INTEL UPDATES (@Ericdavis1343) October 19, 2026
राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा, “जिन्होंने तोड़फोड़ की है, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी. जिन्होंने लूटपाट की है, उन्हें हुए नुकसान की भरपाई करनी होगी और जो लोग गणतंत्र को गिराना चाहते थे, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा.”
‘फ्रांसीसी लोग फ्रांस के साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं?’
कट्टर वामपंथी समूहों को लेकर अपने संबोधन में मैक्रो ने कहा, “इन दृश्यों को देखकर हम सभी ने खुद से यही सवाल पूछा है कि आखिर फ्रांसीसी लोग फ्रांस के साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं?” फ्रांस के अलग-अलग हिस्सों से सामने आए वीडियो में सड़कों पर टूटे हुए कांच, जली हुई साइकिलें और मलबा दिखाई दिया.
मध्य फ्रांस के लिमोज शहर में प्रदर्शनकारियों ने 19वीं सदी के सिटी हॉल में आग लगा दी, जिससे उसकी छत गिर गई और पूरी इमारत लगभग नष्ट हो गई. पेरिस में भारी पुलिस की तैनाती के बीच सैकड़ों प्रदर्शनकारी ‘प्लेस डे ला रिपब्लिक’ पर इकट्ठा हुए. इलाके में बीच-बीच में तनाव बढ़ने पर पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया.
पुलिस स्टेशन में तोड़फोड़
ल्योन में पर्यटक कार्यालय में आग लगा दी गई, जिससे इमारत का बाहरी हिस्सा झुलस गया. आस-पास की दुकानों में भी तोड़फोड़ और लूटपाट की गई. मार्सेई में कुछ प्रदर्शनकारी जबरन सिटी हॉल की लॉबी में घुस गए और हुड और मास्क पहने लोगों ने एक पुलिस स्टेशन में तोड़फोड़ की.
क्या बोलीं मरिन ले पेन
फ्रांस में ये हिंसा राष्ट्रपति चुनाव से चंद महीने पहले हुई है. नेशनल रैली पार्टी की दक्षिणपंथी उम्मीदवार मरिन ले पेन चुनावों में काफी मजबूत स्थिति में दिख रही हैं. ले पेन ने कहा कि इन घटनाओं से पता चलता है कि मैक्रों का प्रशासन पूरी तरह से थक चुका है, दिशाहीन हो गया है और अब उसमें काम करने की कोई ऊर्जा नहीं बची है.
कट्टर-वामपंथी पार्टी ‘फ्रांस अनबोव्ड’ के प्रमुख ज्यां-ल्यूक मेलनचोन जो खुद भी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं, उन्होंने चेतावनी दी कि देश ऐसे हालात की ओर बढ़ सकता है जो आगे चलकर पूरी तरह बेकाबू हो जाएंगे.
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