धान के पौधों को अच्छी बढ़वार के लिए नाइट्रोजन और जिंक जैसे पोषक तत्वों की जरूरत होती है. अगर मिट्टी में इनकी कमी हो जाए, तो पत्तियों का रंग हरा रहने के बजाय पीला पड़ सकता है. ऐसे में पौधों की बढ़वार भी धीमी हो सकती है.

ध्यान धान की फसल को पानी की जरूरत होती है, लेकिन खेत में लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा पानी जमा रहने और निकासी ठीक न होने से जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. इसका असर पौधों की सेहत और पत्तियों के रंग पर भी पड़ सकता है. इसलिए पीलापन दिखने पर खेत में पानी की स्थिति जरूर जांचें.

अगर धान की हरी पत्तियां धीरे-धीरे पीली पड़ने लगें, तो किसान को शुरुआत में ही फसल पर ध्यान देना चाहिए. समस्या बढ़ने पर फसल के बड़े हिस्से को नुकसान हो सकता है. समय रहते वजह पता चल जाए, तो सही कदम उठाकर नुकसान कम करने में मदद मिल सकती है.

पीलापन कुछ पौधों में है या पूरे खेत में फैल रहा है, इस पर ध्यान दें. यह भी देखें कि बदलाव पहले नई पत्तियों में दिखाई दे रहा है या पुरानी पत्तियों में. इन बातों से समस्या को समझने में मदद मिल सकती है, हालांकि सिर्फ पत्तियों का रंग देखकर पक्का कारण तय नहीं किया जा सकता.

पत्तियां पीली होने पर तुरंत किसी भी खाद या दवा का इस्तेमाल करने से बचें. जरूरत से ज्यादा खाद या गलत दवा फसल को नुकसान पहुंचा सकती है. पहले समस्या की वजह समझें और फिर कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही जरूरी खाद या दवा का इस्तेमाल करें.

पत्तियों का पीला होना हमेशा बीमारी का संकेत नहीं होता. इसकी वजह पोषक तत्वों की कमी, खेत में पानी की समस्या या कोई रोग भी हो सकता है. इसलिए लक्षणों को ध्यान से देखें और जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें. सही वजह पता होने पर ही उचित उपाय करना बेहतर है.
Published at : 11 Oct 2026 04:02 PM (IST)






