पिछले साल यानी 2025 में हुए पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ भारत के सैन्य ऑपरेशन सिंदूर में 6 जवानों ने अपनी जान गंवाई थी. इनके नाम नेशनल वॉर मेमोरियल पर दर्ज किए हैं. वहीं, इस पर एक तरफ विपक्ष सियासत कर रहा है, विपक्ष ने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का संसद में दिए भाषण का एक वीडियो भी जारी किया है . इस पर रक्षा मंत्रालय ने बयान दिया कि 28 जुलाई 2025 को संसद में दिए रक्षामंत्री के भाषण को गलत तरीके से दिखाने की कोशिश की गई.
कांग्रेस ने जहां एक तरफ इसे 6 जवानों की जानकारी छुपाने का आरोप सरकार के सिर मढ़ते हुए सैनिकों का अपमान बताया है तो वहीं आरोप लगाया कि देश की संसद को भी गुमराह किया गया.
रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में क्या कहा है?
भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि मीडिया और सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी खबरें हैं, जिन्हें गलत तरीके से दिखाया गया है. प्रेस रिलीज जारी करते हुए कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 6 बहादुर सैनिकों को सर्वोच्च शहादत को हाल ही में पहली बार मान्यता दी गई, या सार्वजनिक रूप से लाया गया, यह दावा पूरी तरह गलत है.
मंत्रालय ने कहा कि यह स्पष्ट किया जाता है कि देश ने इन शहीद नायकों को उन खबरों के आने से बहुत पहले ही सबसे पहले श्रद्धांजलि दी थी. 11 मई 2025 को आयोजित तत्कालीन मिलिट्री ऑपरेशन्स के महानिदेश ने इन बहादुर सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी. साथ ही ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्यूटी पर उनके बलिदान को मान्यता दी. इन बहादुर सैनिकों को वीरता पुरस्कार दिए गए. इसकी जानकारी 14 अगस्त 2025 की प्रेस विज्ञाप्ति में प्रकाशित की गई थी. यह भारतीय रक्षा बलों की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप उनकी वीरता और सर्वोच्च बलिदान की औपचारिक और राष्ट्रीय मान्यता थी. इसके अलावा भारतीय सेना के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इन बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई.
देश नेशनल हिरोज को सम्मान देता रहा है: रक्षा मंत्रालय
मंत्रालय की तरफ से स्पष्ट किया गया कि इन नेशनल हिरोज को देश लगातार सम्मान देता रहा है. 15 जनवरी 2026 को जयपुर में आयोजित सेना दिवस परेड के दौरान सेना के चीफ ने इनमें से तीन बहादुर सैनिकों के परिवारों को सेना मेडल प्रदान किया. वायुसेना प्रमुख ने 8 अक्टूबर 2025 को भी ऐसा ही किया. वहीं, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीद सैनिकों के नाम अंकित करने को लेकर मुद्दा है तो इसके लिए प्रोटोकॉल और तय प्रकिया है. यह कहना उचित सम्मान नहीं दिया गया, यह तथ्यात्मक रूप से बेहद ही गलत है. मंत्रालय ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर अनावश्यक और निराधार विवाद खड़ा हो गया है.






