केंद्र सरकार मानूसन सत्र में फिर से महिला आरक्षण और परिसीमन बिल लाने की तैयारी में है. इसको लेकर सभी राजनीतिक दलों के साथ सरकार चर्चा भी कर रही है. इसी बीच परिसीमन बिल पर सुप्रिया सुले के संकेत ने संसद के नंबर गेम को और दिलचस्प बना दिया है. सीटें बढ़ाने और 50 फीसदी आरक्षण की सीमा पर चर्चा की शर्त के साथ एनसीपी शरदचंद्र पवार समर्थन पर विचार कर सकती है. सरकार की नजर JMM, AAP और NC के सांसदों पर भी है, लेकिन इस खेल की सबसे बड़ी चाबी डीएमके के हाथ में है.
लोकसभा में टीएमसी और शिवसेना सांसदों के पाला बदलने के बाद अब एनडीए के पास 318 सांसद हैं. दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 वोट चाहिए. यानी सरकार के सामने 42 अतिरिक्त वोट जुटाने की चुनौती है. हालांकि जब पिछले सत्र में बिल को लेकर वोटिंग हुई थी तब YSRCP ने बिल के पक्ष में मतदान किया था उसको जोड़ने के बाद 38 वोट की जरूरत रह जाती है.
लोकसभा का नंबर गेम
कुल प्रभावी संख्या- 540, तीन सीटें अभी खाली है.
दो-तिहाई बहुमत- 360
NDA के पास 322 वोट अभी हैं.
सरकार को चाहिए 38 अतिरिक्त वोट
अब सरकार की नजर विपक्षी खेमे के कई सांसदों पर है. समाजवादी पार्टी के 37 सांसद, आरजेडी के 4 सांसद और एनसीपी शरदचंद्र पवार के 8 सांसद. सूत्रों के मुताबिक JMM के 3 और NC के 2 सांसदों के साथ भी सरकार समपर्क में है. संसद में नंबर गेम ऐसा है हर सांसद का हिसाब हो रहा है.सरकार समर्थन जुटाने के साथ-साथ वोटिंग से दूरी के विकल्प पर भी काम कर रही है.
शरद पवार की पार्टी के 8 सांसद इस पूरे गणित में बड़ा फैक्टर हैं. अगर सभी राज्यों में 50 फीसदी तक सीटें बढ़ाने के फॉर्मूले पर सहमति बनती है तो एनसीपी शरदचंद्र पवार के रुख में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा. 8 सांसद सरकार के साथ आते हैं तो सरकार द्वारा लाए जाने वाले बिल के समर्थन में संख्या 330 हो जाएगी. लेकिन फिर भी 30 वोट की जरूरत रहेगी, यानी गणित अभी भी पूरा नहीं हुआ है. यहीं से शुरू होता है DMK FACTOR.
लोकसभा- 22 सांसद
राज्यसभा- 8 सांसद
कुल- 30 सांसद
डीएमके के पास लोकसभा में 22 सांसद हैं.अगर डीएमके सरकार के समर्थन में वोट करती है तो सरकार का आंकड़ा 352 तक पहुंच जाएगा. यानी 360 के बहुमत से सिर्फ 8 वोट दूर. और अगर डीएमके समर्थन के बजाय एब्सटेन करती है , तो सदन में मौजूद सांसदों की संख्या घटेगी और बहुमत का आंकड़ा भी नीचे आएगा. मतलब डीएमके चाहे समर्थन करे या दूरी बनाए दोनों ही स्थिति में उसका फैसला अहम है. इसीलिए कहा जा रहा है परिसीमन की चाबी अब भी डीएमके के हाथ में है.
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राज्यसभा में सरकार का नंबर गेम
दो-तिहाई बहुमत- 164
सरकार के पास- 155
बंगाल उपचुनाव के बाद- 158
चाहिए- 6 सांसदों का समर्थन
या 12 सांसद ABSTAIN करें
राज्यसभा में सरकार का नंबर गेम लोकसभा के मुकाबले आसान दिखाई दे रहा है. बंगाल की तीन सीटों पर उपचुनाव के बाद सरकार की संख्या 158 हो जाएगी. दो-तिहाई बहुमत के लिए सिर्फ 6 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी. राज्यसभा में डीएमके के 8 सांसद हैं. मतलब यहां भी डीएमके समर्थन करे या एब्सटेन ,सरकार का काम आसान हो सकता है.
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