Azerbaijan-Russia Conflict: महज कुछ पहले तक रूस और अजरबैजान के रिश्ते गहरे सहयोग और विश्वास पर आधारित थे. 2020 के नागोर्नो-कराबाख युद्ध के समय रूस ने अजरबैजान की स्थिति को खुलकर समर्थन दिया था और युद्ध के बाद पुतिन ने अजरबैजान की ऐतिहासिक यात्रा कर दोनों देशों के रिश्तों को एक नया मुकाम दिया था, लेकिन 2024 के अंत तक आते-आते यह समीकरण पूरी तरह से उलट गया. दिसंबर 2024 में अजरबैजानी विमान के रूस में मार गिराए जाने से हालात तेजी से बिगड़ने लगे. बता दें कि अजरबैजान वही देश है, जिसने भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान पाकिस्तान का साथ दिया था.
ग्रोज्नी के पास रूस ने एक अजरबैजानी नागरिक विमान को यूक्रेनी ड्रोन समझकर गलती से निशाना बना दिया, जिसमें 38 लोगों की मौत हुई. इसके बाद रूस ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण गलती बताया, लेकिन अज़रबैजान ने इसे गंभीर सैन्य लापरवाही माना. नागरिकों की मौत ने जनता और सरकार दोनों को उकसा दिया. यह हादसा अजरबैजान के भीतर रूसी प्रभाव के खिलाफ एक उबाल का कारण बना.
येकातेरिनबर्ग में पुलिस कार्रवाई से और बढ़ा तनाव
इसके बाद एक और घटना ने स्थिति को विस्फोटक बना दिया. रूसी पुलिस ने येकातेरिनबर्ग में दो अजरबैजानी भाइयों की संदिग्ध मौत को लेकर छापा मारा. शवों के अज़रबैजान पहुंचने पर पोस्टमार्टम में पाया गया कि पुलिस हिरासत में प्रताड़ना से मौत हुई है. अजरबैजान ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन करार दिया. इसके साथ ही रूसी उप-प्रधानमंत्री की यात्रा रद्द कर दिए गए और सभी सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थगित हो गए.
अजरबैजान की आक्रामकता
अज़रबैजान ने इसके बाद कई रूसी नागरिकों और मीडिया संस्थानों पर कार्रवाई की. इसके तहत अजरबैजान स्थित स्पुतनिक के कार्यालय पर छापा मारा गया और संपादक को गिरफ्तार कर लिया गया. रूसी स्कूल बंद करने की चेतावनी दी गई साथ ही रूसी नागरिकों पर ड्रग्स और जासूसी के आरोप भी लगे.
अजरबैजान में तुर्किए की भूमिका
तुर्किए अजरबैजान का सबसे करीबी सहयोगी है. रूस के हुए पूरे घटनाक्रम में एक मुख्य रणनीतिक खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है. तुर्किए और अजरबैजान ज़ंगेज़ुर कॉरिडोर सौदे में रूस को दरकिनार करने की योजना बना रहे हैं. यह कॉरिडोर अज़रबैजान को नखचिवन एक्सक्लेव से जोड़ेगा रूसी FSB के नियंत्रण से बाहर. रिपोर्ट्स के अनुसार, तुर्किए आर्मेनिया-अजरबैजान शांति समझौते में भी मध्यस्थता कर रहा है. तुर्किए जानता है कि रूस यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते कमजोर स्थिति में है और इसी का फायदा उठाकर वह क्षेत्रीय संतुलन में बदलाव चाहता है.





