- पासवर्ड को अब पुरानी तकनीक मानते हुए रिटायर किया गया है।
- ऑनलाइन सुरक्षा के लिए पासकी (Passkey) का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
- पासकी फिंगरप्रिंट, फेस स्कैन से डिवाइस को सुरक्षित बनाती है।
- पासकी पासवर्ड से आठ गुना तेज और फिशिंग से सुरक्षित है।
Password Vs Passkey: अगर आप अपने डिवाइस या अकाउंट्स की सेफ्टी के लिए पासवर्ड यूज कर रहे हैं तो यह तरीका पुराना हो गया है. 1961 में शुरू हुए पासवर्ड अब ‘रिटायर’ हो गए हैं. यूके के नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर (NCSC) ने कहा है कि अब सेफ रहने के लिए पासवर्ड यूज करने की सलाह नहीं देगी. यह पहली बार है, जब किसी बड़ी इंटेलीजेंस एजेंसी ने पासवर्ड को रिटायर कर दिया है. NCSC ने कहा है कि अब लोगों को ऑनलाइन सेफ्टी के लिए पासकी (Passkey) यूज करनी चाहिए. आइए जानते हैं कि पासकी क्या होती है और क्यों इसके इस्तेमाल की सलाह दी जा रही है.
क्या होती है Passkey?
एक Public Key और Private Key मिलकर Passkey क्रिएट करती हैं. यानी Passkey आपके फोन, लैपटॉप और दूसरे डिवाइस की फिजिकल सिक्योरिटी Key से डिजिटल क्रेडेंशियल का एक यूनीक पेयर क्रिएट करेगी. इनमें से एक आपके डिवाइस पर स्टोर रहेगा, जबकि दूसरा वेबसाइट आदि पर शेयर किया जाता है. इसके बाद आपका डिवाइस फिंगरप्रिंट, फेस स्कैन या स्क्रीन लॉक के जरिए आपकी आइडेंटिटी को ऑथेंटिकेट करेगा. इसके लिए आपको न तो कोई पासवर्ड याद रखने की जरूरत है और न ही कुछ टाइप करने की जरूरत पड़ेगी.
पासवर्ड से कैसे बेहतर है Passkey?
- NCSC का कहना है कि पासकी पासवर्ड की तुलना में फास्ट है. पासवर्ड टाइप करने की तुलना में पासकी से आठ गुना तेजी से लॉग-इन किया जा सकता है.
- पासकी का अंदाजा लगाना मुश्किल है. पासवर्ड का अंदाया लगाया जा सकता है, लेकिन पासकी के मामले में ऐसा नहीं हो सकता. इसलिए फिशिंग स्कैम का डर खत्म हो जाता है.
- NCSC का मानना है कि पासकी में OTP की जरूरत नहीं होती. इसलिए कंपनियां मैसेज भेजने में आने वाली करोड़ों की लागत बचा सकती है.
- स्ट्रॉन्ग पासवर्ड में कई नंबर, लैटर और स्पेशल कैरेक्टर यूज करने पड़ते हैं, जिन्हें याद रखना मुश्किल हो सकता है. पासकी इस झंझट को भी दूर कर देती है. इसमें कुछ याद रखने की जरूरत नहीं होती.
कंपनियां भी दे रही हैं पासकी पर जोर
NCSC के अलावा अब कई कंपनियां भी पासकी पर जोर देने लगी है. दरअसल, साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों के बीच पासवर्ड से पूरी सेफ्टी नहीं मिल रही है. इसलिए अब लॉग-इन के नए तरीके को आजमाया जा रहा है. माइक्रोसॉफ्ट ने काफी समय पहले अपनी ऑथेंटिकेटर ऐप से पासवर्ड सपोर्ट हटाकर उसमें पासकी सपोर्ट जोड़ा है. इसी तरह अमेजन भी पासकी यूज करने पर जोर दे रही है.
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