पीस टॉक में बलि का बकरा कौन, जेडी वेंस या नेतन्याहू?

पीस टॉक में बलि का बकरा कौन, जेडी वेंस या नेतन्याहू?


US Iran War: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच चल रही संभावित वार्ताओं ने अब एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है. अगर डील नहीं होती तो जिम्मेदारी किस पर डाली जाएगी? अमेरिकी राजनीति में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने पुराने अंदाज के तहत इस बार भी असफलता का ठीकरा किसी और पर फोड़ेंगे, और क्या इसके लिए जेडी वेंस को आगे किया जा रहा है.

क्यों वेंस बन सकते हैं निशाना?

ट्रंप की राजनीति का पुराना पैटर्न रहा है- सफलता का पूरा श्रेय खुद लेना और असफलता का दोष दूसरों पर डालना. मौजूदा हालात में जेडी वेंस सीधे तौर पर युद्ध के फैसलों में शामिल नहीं थे, लेकिन अब उन्हें वार्ता प्रक्रिया में आगे कर दिया गया है. ऐसे में अगर कोई समझौता नहीं होता, तो 2028 के चुनावी समीकरण में उनकी छवि को नुकसान हो सकता है.

‘हाई-रिस्क मिशन’ में धकेले गए वेंस?

कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ट्रंप ने जानबूझकर वेंस को एक ऐसे मिशन में डाला है, जिसमें जोखिम ज्यादा और फायदा कम है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर बातचीत विफल होती है, तो वेंस को आसानी से ‘बलि का बकरा’ बनाया जा सकता है.

ट्रंप का बयान बना चर्चा का केंद्र

ईस्टर लंच के दौरान ट्रंप का एक बयान अब खूब वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने मजाकिया अंदाज में लेकिन स्पष्ट तौर पर कहा था-‘अगर डील नहीं होती तो मैं जेडी वेंस को दोष दूंगा, और अगर हो जाती है तो पूरा श्रेय मैं लूंगा.” इस बयान ने उनके इरादों को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

क्या इजराइल पर भी आ सकता है आरोप?

रिपब्लिकन खेमे में यह भी चर्चा है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो क्या इजराइल को भी इस संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. जैसे-जैसे ‘अच्छे नतीजों” की संभावना कम होती जा रही है, वैसे-वैसे ट्रंप के समर्थक किसी और को दोष देने के विकल्प तलाश सकते हैं.

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‘गुड-इश’ डील क्या हो सकती है?

विश्लेषकों के मुताबिक अब एक ही ‘कुछ हद तक अच्छा” परिणाम बचा है-ईरान होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने पर सहमत हो जाए और बदले में अमेरिका फारस की खाड़ी से अपनी सेना हटा ले. हालांकि यह पूरी तरह अच्छा सौदा नहीं होगा, क्योंकि इससे न तो ईरान में शासन परिवर्तन होगा और न ही उसके परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह रोका जा सकेगा.

युद्ध और आर्थिक संकट का खतरा

मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ा खतरा ऊर्जा संकट और बड़े पैमाने पर युद्ध का है. अगर अमेरिका सैन्य कार्रवाई करता है, तो हजारों सैनिकों की जान खतरे में पड़ सकती है और क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है. वहीं, अगर बिना शर्त पीछे हटता है, तो यह ट्रंप और अमेरिकी ताकत के लिए बड़ी छवि क्षति होगी.

ट्रंप की ‘डील’ रणनीति पर सवाल

हाल के दिनों में ट्रंप की रणनीति ‘डर और लालच” दोनों का इस्तेमाल करते हुए ईरान को समझौते की ओर धकेलने की रही है. एक तरफ वह हमले की समयसीमा बढ़ाते हैं, तो दूसरी तरफ अतिरिक्त सैनिक भेजने की धमकी देते हैं. लेकिन अगर ईरान नहीं झुकता, तो आगे क्या होगा-इसका स्पष्ट जवाब खुद ट्रंप के पास भी नहीं दिखता.

अनिश्चितता के बीच बढ़ता दबाव

जैसे-जैसे समय बीत रहा है और कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ रहा, ट्रंप पर राजनीतिक और रणनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है. ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में यह वार्ता किस दिशा में जाती है और अंततः ‘बलि का बकरा” कौन बनता है. 



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