पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े, अब भी 75000 करोड़ के घाटे में तेल कंपनियां! सरकार देगी राहत- रिपोर्ट

पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े, अब भी 75000 करोड़ के घाटे में तेल कंपनियां! सरकार देगी राहत- रिपोर्ट


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  • अमेरिका-ईरान जंग से पेट्रोल-डीजल ₹7.5 बढ़े, कंपनियां घाटे में.
  • तेल कंपनियों को ₹74,781 करोड़ घाटा, सरकार राहत पैकेज देगी.
  • कच्चे तेल $90 पार, कंपनियों की उम्मीदें टूटी, मांगी मदद.
  • राहत पैकेज से राजकोषीय घाटा बढ़ने का सरकार को डर.

Petrol-Diesel Price: अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी, 2026 से जंग शुरू होने के बाद से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अब तक कुल 7.5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुकी है. बावजूद इसके सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) अब भी घाटे में चल रही हैं. आलम यह है कि अब सरकार इन तेल कंपनियों को लगभग 75000 करोड़ रुपये का राहत पैकेज देने पर विचार कर रही है.

हाल ही में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि सार्वजनिक क्षेत्र की तीन बड़ी तेल कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) को  अप्रैल-जून तिमाही के दौरान 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब सरकार इन कंपनियों को आर्थिक मदद देने के प्रस्ताव पर काम कर रही है. इन कंपनियों ने अप्रैल-जून तिमाही में हुए लगभग 75,000 करोड़ रुपये के नुकसान के लिए राहत की मांग की थी.

उम्मीदों पर फिरा पानी

इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, इन तीनों कंपनियों को शुरू में उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम के बाद बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर लगभग 71 डॉलर प्रति बैरल हो जाएगी, जिससे वे इस नुकसान की भरपाई कर सकेंगी. हालांकि, पश्चिमी एशिया में फिर से तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतें वापस से 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं, जिससे उनकी उम्मीदें टूट गईं और कंपनियों को सरकार से मदद मांगनी पड़ी.

राहत पैकेज पर कितनी आगे बढ़ी बात?

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय फिलहाल इस वित्तीय सहायता के प्रस्ताव पर काम रहा है. इसे यूनियन कैबिनेट के सामने रखने से पहले फाइनेंस मिनिस्ट्री की मंजूरी की जरूरत होगी. इस प्रक्रिया में अलग-अलग मंत्रालयों के बीच हफ्तों या महीनों तक बातचीत हो सकती है. सरकार के सामने दुविधा यह है कि सरकार पहले से ही पेट्रोल और डीजल पर संभावित टैक्स कलेक्शन में लगभग 10 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठा रही है. ऐसे में तेल कंपनियों को इतना बड़ा बेलआउट पैकेज देने से देश का राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है. 

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