पेस्टिसाइड्स के लगातार संपर्क से बढ़ सकता है 150% तक कैंसर का खतरा, नई स्टडी का दावा, जानें क्य

पेस्टिसाइड्स के लगातार संपर्क से बढ़ सकता है 150% तक कैंसर का खतरा, नई स्टडी का दावा, जानें क्य


Pesticides Exposure Cancer Risk : हम अपनी डेली लाइफ में जो खाना खाते हैं, जो पानी पीते हैं और जिस हवा में सांस लेते हैं, उसमें कई तरह के केमिकल मौजूद हो सकते हैं, इन्हीं में से एक जरूरी केमिकल समूह कीटनाशक यानी पेस्टिसाइड्स है, जिनका यूज खेती में फसलों को कीड़ों और बीमारियों से बचाने के लिए किया जाता है. 

हाल ही में एक नई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च ने चिंता बढ़ा दी है. इस अध्ययन के अनुसार, जिन इलाकों में पेस्टिसाइड्स का ज्यादा यूज होता है, वहां रहने वाले लोगों में कुछ प्रकार के कैंसर होने का खतरा 150 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. यह रिपोर्ट पर्यावरणीय स्वास्थ्य और रसायनों के प्रभाव को लेकर एक गंभीर चेतावनी मानी जा रही है. 

नई स्टडी क्या कहती है?

यह रिसर्च जर्नल Nature Health में प्रकाशित हुई है. इसमें बताया गया है कि लोग एक साथ सिर्फ एक नहीं कई पेस्टिसाइड्स के संपर्क में रहते हैं. पहले के अध्ययन सिर्फ एक-एक केमिकल को अलग-अलग देखकर किए जाते थे, लेकिन असली लाइफ में हम मिक्सचर एक्सपोजर यानी कई रसायनों के संयुक्त प्रभाव में रहते हैं. इस अध्ययन ने इस स्थिति को ध्यान में रखकर विश्लेषण किया है, जो इसे पहले की रिसर्च से ज्यादा जरूरी बनाता है. इस अध्ययन के लिए दक्षिण अमेरिकी देश पेरू को चुना गया. 

पेरू को क्यों चुना गया?

दक्षिण अमेरिकी देश पेरू में कृषि बड़े पैमाने पर होती है. अलग-अलग तरह के पर्यावरणीय क्षेत्र मौजूद हैं. सामाजिक और आर्थिक असमानताएं ज्यादा हैं. इसलिए इस अध्ययन के लिए  पेरू को चुना गया. ऐसे में यहां रिसर्च में पाया गया कि ग्रामीण और आदिवासी समुदाय सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. कई लोगों पर एक साथ लगभग 12 अलग-अलग पेस्टिसाइड्स का असर पाया गया. ये स्तर कई जगहों पर काफी ज्यादा था. 

रिसर्च में कैसे किया गया विश्लेषण?

वैज्ञानिकों ने 31 सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाले पेस्टिसाइड्स का अध्ययन किया. 2014 से 2019 तक उनके फैलाव को ट्रैक किया और 2007 से 2020 तक 1.5 लाख से ज्यादा कैंसर मरीजों के स्वास्थ्य डेटा से तुलना की, रिसर्च में पाया गया कि जिन क्षेत्रों में पेस्टिसाइड्स का स्तर ज्यादा था, वहां कैंसर के मामले भी ज्यादा थे. खास बात यह है कि जिन पेस्टिसाइड्स का अध्ययन किया गया, वे अभी तक WHO के तहत कैंसर पैदा करने वाले (carcinogenic) नहीं माने गए हैं. इसके बावजूद उनके संयुक्त प्रभाव से स्वास्थ्य पर गंभीर असर देखा गया. 

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शरीर पर क्या असर होता है?

रिसर्च के अनुसार, पेस्टिसाइड्स शरीर में धीरे-धीरे असर डालते हैं. यह कोशिकाओं (cells) के सामान्य कामों में बाधा डालते हैं. लंबे समय में शरीर की इम्यूनिटी कमजोर कर सकते हैं. इससे लिवर सबसे ज्यादा प्रभावित होता है. यह बदलाव तुरंत दिखाई नहीं देते, लेकिन समय के साथ गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं. आज के समय में रसायनों की सुरक्षा जांच आमतौर पर एक-एक केमिकल को अलग-अलग जांचती है और उसके लिए सुरक्षित सीमा तय करती है, लेकिन समस्या यह है कि असली जिंदगी में लोग एक साथ कई रसायनों के संपर्क में रहते हैं. 

रिसर्च में और क्या-क्या बताया गया?

रिसर्च यह भी बताती है कि एल नीनो (El Niño) जैसे जलवायु बदलाव पेस्टिसाइड्स के उपयोग और उनके फैलाव को प्रभावित कर सकते हैं. इससे पर्यावरण में इन रसायनों की मात्रा और बढ़ सकती है. हालांकि यह अध्ययन पेरू पर आधारित है, लेकिन इसके निष्कर्ष दुनिया भर पर लागू हो सकते हैं क्योंकि कई देशों में बड़े पैमाने पर खेती होती है, पेस्टिसाइड्स का उपयोग सामान्य है. नियम और निगरानी हर जगह एक जैसी नहीं है. इसलिए यह एक वैश्विक स्वास्थ्य चिंता बन सकती है. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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