फूलगोभी की ये किस्में आपको दिलाएंगी मोटा मुनाफा, जानें बोने का सही टाइम

फूलगोभी की ये किस्में आपको दिलाएंगी मोटा मुनाफा, जानें बोने का सही टाइम


हरी सब्जियों की खेती में उनकी सही किस्मों का लगाना जरूरी होता है. अगर सही किस्मों के साथ सही समय पर बुआई की जाए तो किसान कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं. सितंबर का यह महीना फूलगोभी की अगेती और बीच के सीजन की बुवाई के लिए सबसे सही माना जाता है. जो किसान इस वक्त अपने खेत में गोभी की उन्नत किस्मों की पौध लगा देंगे उनकी फसल दीवाली के आसपास और शुरुआती सर्दियों में मंडियों में सबसे पहले पहुंचेगी. 

उस समय बाजार में ताजी गोभी की आवक कम होती है और मांग काफी हाई रहती है. जिससे थोक भाव 40 से 60 रुपये किलो तक आसानी से मिल जाता है. हालांकि कई किसान गलत किस्म चुनकर और गलत समय पर रोपाई करके घाटा उठा बैठते हैं. कृषि वैज्ञानिकों का भी मानना है कि गोभी से अच्छी पैदावार और गठीला फूल लेने के लिए मौसम के मुताबिक बीजों का चयन सबसे जरूरी है. चलिए आपको बताते हैं कि इस समय किन किस्मों को लगाना सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होगा.

पूसा केतकी और पूसा दीपाली

अगर आप इस सीजन गोभी की खेती से बहुत अच्छा उत्पादन चाहते हैं. तो भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान यानी IARI की तैयार की गई पूसा केतकी और पूसा दीपाली इसके लिए सबसे बेहतरीन ऑप्शन हैं. इन किस्मों की नर्सरी तैयार करने और रोपाई के लिए सितंबर का महीना एकदम सही माना जाता है. पूसा केतकी की खासियत यह है कि यह रोपाई के करीब 60 से 70 दिनों के भीतर कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है. 

इसके फूल का रंग एकदम सफेद, गठीला और मध्यम आकार का होता है. जो थोक और खुदरा दोनों मंडियों में हाथों-हाथ बिकता है. वहीं, पूसा दीपाली भी कम समय में तैयार होने वाली ऐसी वैरायटी है. जो हल्की गर्मी और उमस को आसानी से झेल लेती है. अगर खेत में पानी निकलने का सही इंतजाम हो. तो इन दोनों किस्मों से प्रति एकड़ 80 से 100 क्विंटल तक की बढ़िया पैदावार निकाली जा सकती है. जिससे लागत की तुलना में दोगुना मुनाफा आराम से बन जाता है.

पूसा शरद और काशी कुंवारी

मि़ड-सीजन बुवाई के लिए पूसा शरद और काशी कुंवारी किसानों की पहली पसंद बनी हुई हैं. जो किसान सितंबर के दूसरे पखवाड़े में पौध तैयार कर रहे हैं उनके लिए यह दोनों किस्में किसी वरदान से कम नहीं हैं. पूसा शरद के फूल का वजन काफी भारी और ठोस होता है. जिससे तौल में किसान को सीधा फायदा मिलता है. यह किस्म करीब 80 से 85 दिनों में कटाई के लिए तैयार होती है और पाले या बदलते तापमान का इस पर बहुत बुरा असर नहीं पड़ता. 

वहीं भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान यानी IIVR की ओर से विकसित काशी कुंवारी भी अपनी रोगरोधी क्षमता के लिए जानी जाती है. इसमें तना गलन और ब्लैक रॉट जैसी फफूंद जनित बीमारियों का खतरा दूसरी देसी किस्मों के मुकाबले बेहद कम रहता है. इसका पत्ता फूल को चारों तरफ से अच्छी तरह ढककर रखता है. जिससे धूप लगने से फूल पीला नहीं पड़ता और मंडी में इसका बढ़िया भाव मिलता है.

फूलगोभी की ये किस्में आपको दिलाएंगी मोटा मुनाफा, जानें बोने का सही टाइम

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खेत की तैयारी और रोपाई का तरीका जान लें

मुनाफा सिर्फ अच्छे बीज से नहीं बल्कि तकनीक के सही इस्तेमाल पर निर्भर रहता है. गोभी लगाने से पहले खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई करें और प्रति एकड़ 8 से 10 टन अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद जरूर मिलाएं. चूंकि सितंबर में अचानक तेज बारिश का खतरा रहता है. इसलिए पौध को हमेशा मेड़ यानी रिज एंड फरो विधि से ही लगाएं. पौधे से पौधे की दूरी करीब 45 सेंटीमीटर और लाइन से लाइन की दूरी 60 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. 

ऐसा करने से पौधों की जड़ों में पानी नहीं रुकता और तना गलन की बीमारी से बचाव होता है. रोपाई शाम के वक्त करें और तुरंत हल्की सिंचाई कर दें. नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के संतुलित इस्तेमाल के साथ-साथ जब फूल बनने लगे तो बोरॉन और मोलिब्डेनम का हल्का छिड़काव जरूर करें. इससे फूल सफेद, चमकदार और ठोस बनता है, जिसका ट्रांसपोर्टेशन के दौरान वजन नहीं घटता और किसान को उसका पूरा मुनाफा मिलता है.

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