बांग्लादेश में धार्मिक असहिष्णुता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच ढाका समेत कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं. स्थानीय मीडिया के अनुसार, गाइबांधा जिले में भगवान राम की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाने के विरोध में एक प्रदर्शन के दौरान कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने कथित तौर पर उनकी तस्वीर का अपमान किया. भारत ने इस पर बयान जारी कर कहा कि बांग्लादेश सरकार अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करे.
चरमपंथियों पर नकेल कसे बांग्लादेश: भारत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बांग्लादेश में हिंदू देवी-देवताओं के मंदिरों को अपवित्र करने की खबरों के बारे में पूछे गए एक सवाल का भी जवाब दिया. उन्होंने ने कहा, ‘हमने बांग्लादेश में हिंदू देवी-देवताओं (के मंदिरों) और उनकी मूर्तियों को अपवित्र करने की उन घटनाओं के बारे में रिपोर्ट देखी है, जिसे लेकर विरोध-प्रदर्शन हुए हैं.’ उन्होंने कहा, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि बांग्लादेश सरकार वहां चरमपंथियों पर नकेल कसेगी और अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी.
तारिक रहमान के सलाहकार को लेकर भारत का बयान
विदेश मंत्रालय ने कहा कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सलाहकार जाहिद उर रहमान को अपनी यात्रा का उद्देश्य दोबारा बताने के बाद भारत में प्रवेश की अनुमति दे दी गई थी, लेकिन उन्होंने ढाका लौटने का फैसला किया. हफ्ते भर से अधिक समय पहले, नयी दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने रहमान को कुछ देर के लिए रोक लिया था क्योंकि उनका सुरक्षा कारणों के कारण ब्लैक लिस्टेड था. इसके बाद, बांग्लादेश ने भारत के समक्ष विरोध दर्ज कराया था.
अपनी मर्जी से ढाका लौटे जाहिद उर रहमान: भारत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सलाहकार 14 जून को दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन वीजा के साथ निजी पासपोर्ट पर भारत आए थे, ताकि वह ‘इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन’ के वरिष्ठ अधिकारियों की समिति की 28वीं बैठक में शामिल हो सकें. दिल्ली एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की और इस बात की पुष्टि होने के बाद कि उनकी यात्रा का उद्देश्य बहुपक्षीय बैठक में शामिल होना है, उन्हें देश में प्रवेश की अनुमति दे दी गई. हालांकि, उन्होंने अपनी मर्जी से ढाका लौटने का फैसला किया.’






