बाढ़ से असम में बर्बाद हुए किसानों के खेत, वहां कैसे मिलेगा मुआवजा?

बाढ़ से असम में बर्बाद हुए किसानों के खेत, वहां कैसे मिलेगा मुआवजा?


Assam Flood Compensation For Farmers: असम में इस साल आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ऊपरी असम के जोरहाट, गोलाघाट, शिवसागर और चराइदेव जैसे जिलों में बाढ़ के पानी ने किसानों की हजारों हेक्टेयर फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है, ऊपरी असम के जोरहाट, गोलाघाट, शिवसागर और चराइदेव जैसे जिलों में बाढ़ के पानी ने किसानों की हजारों हेक्टेयर फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है. खेतों में खड़ी फसलें नष्ट हो चुकी हैं और उपजाऊ मिट्टी बह गई है, जिससे किसानों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. ऐसे मुश्किल समय में असम सरकार और केंद्र सरकार किसानों की मदद के लिए आगे आई हैं. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बाढ़ पीड़ितों और किसानों के लिए एक बड़े राहत पैकेज का ऐलान किया है. 

फसल नुकसान का सर्वे

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, 9 अगस्त से सरकारी अधिकारी घर-घर और खेत-खेत जाकर बाढ़ से हुए स्थायी नुकसान का सटीक सर्वे शुरू कर देंगे. स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड के नियमों के तहत सबसे पहले फसल खराबी की रिपोर्ट तैयार की जाएगी. उसके बाद कुछ विशेष पैमानो के तहत बाढ़ प्रभावित फसलों के लिए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सरकार की तरफ से सहायता राशि दी जाएगी. इसके अलावा, गंभीर रूप से प्रभावित परिवारों को तुरंत राहत के तौर पर ₹15,000 की अंतरिम सहायता डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर डिबीटी के जरिए सीधे बैंक खातों में भेजी जा रही है. साथ ही शिवसागर और चराइदेव जैसे सबसे प्रभावित इलाकों में जो लोग 10 अगस्त तक घर नहीं लौट पाएंगे, उन्हें ₹10,000 की अतिरिक्त मदद भी मिलेगी. 

यह भी पढ़ें – पीएम किसान योजना को लेकर बड़ा अपडेट, इतने साल और मिलेगा लाभ

मुआवजा और विशेष छूट

किसानों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए असम सरकार ने दो बहुत बड़े फैसले लिए हैं. पहला तो बाढ़ प्रभावित जिलों के किसानों को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कोई जमीन कर या लगान देने की जरूरत नहीं होगी. दूसरे बड़े फैसले में असम सरकार जुलाई 2026 के महीने में डोमेस्टिक और ‘जीवन धारा’ कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं का 300 यूनिट तक का बिजली बिल पूरी तरह माफ कर रही है.साथ ही मुआवजा पाने के लिए किसान अपने गांव के पटवारी, ग्राम प्रधान या कृषि विभाग के नोडल अधिकारी के पास जाकर नुकसान का ब्योरा लिखित में दर्ज करवाएं. कुछ जरुरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, बैंक पासबुक जिसमें डीबीटी चालू हो, खेत के कागजात खसरा और खतौनी अपने पास संभालकर रखें. साथ ही सरकार ने बीमा कंपनियों को सख्त निर्देश दिया है कि इस आपातकाल में किसानों से ज्यादा कागजात न मांगे जाएं. सिर्फ वीडियो सबूत और किसान के हस्ताक्षर वाले फॉर्म के आधार पर दावों का निपटारा तुरंत किया जाए. 

यह भी पढ़ें – किसानों के बच्चों के लिए खुशखबरी! हर महीने मिलेंगे 5000 रुपये



Source link