वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, पश्चिम एशिया एक बार फिर दुनिया का सबसे संवेदनशील और विस्फोटक केंद्र बन गया है. एक तरफ जहां नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का आयोजन चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ खाड़ी देशों विशेषकर सऊदी अरब के सामने अस्तित्व और आर्थिक सुरक्षा का एक बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है. होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग ठप होने के बाद, अब लाल सागर के प्रवेश द्वार पर मंडराते खतरों ने सऊदी अरब और पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींद उड़ा दी है.
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमला और शटडाउन
ईरान और पश्चिम एशिया में जारी व्यापक संघर्ष के बीच, सऊदी अरब की जीवन रेखा कही जाने वाली पूर्व-पश्चिम (East-West) तेल पाइपलाइन पर गंभीर हमला हुआ है. सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि रियाद और मदीना क्षेत्रों में इस मुख्य पाइपलाइन पर कई ड्रोन हमले किए गए, जिसके बाद एहतियातन इस पूरी सप्लाई लाइन को बंद करना पड़ा है.
यह पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों से कच्चे तेल को सीधे लाल सागर तट पर स्थित यान्बु बंदरगाह तक पहुंचाती है. होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी कार्रवाइयों की वजह से जब खाड़ी से तेल टैंकर्स का निकलना बेहद खतरनाक हो गया था, तब इसी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन ने सऊदी अरब को वैकल्पिक रास्ता दिया था.
यह पाइपलाइन प्रतिदिन 4 से 5 मिलियन बैरल (यानी वैश्विक सप्लाई का लगभग 4% से 5%) तेल की आवाजाही संभालती थी. इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में खलबली मच गई है और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं.
सऊदी विदेश मंत्रालय ने प्रारंभिक बयानों में संकेत दिया है कि ये ड्रोन हमले इराक की सीमा के भीतर से आए थे, जहां ईरान समर्थित मिलिशिया सक्रिय हैं. हालांकि, इराकी प्रधानमंत्री के आग्रह पर सऊदी अरब ने फिलहाल सीधे सैन्य प्रतिक्रिया से परहेज किया है ताकि बगदाद सरकार को दोषियों पर कार्रवाई का मौका मिल सके, लेकिन किंगडम ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है.
हूती विद्रोहियों का बाब अल-मंदेब और लाल सागर पर बढ़ता शिकंजा
इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने ज़मीन पर बहुत बड़ी रणनीतिक बढ़त हासिल कर ली है. यमन के सरकारी और सैन्य सूत्रों के अनुसार, हूती लड़ाकों ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम लाल सागर तट के बंदरगाह शहर मोचा पर कब्जा करने के बाद, बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के मुहाने पर स्थित बेहद महत्वपूर्ण प्रीम द्वीप पर भी अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है.
बाब अल-मंदेब दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री ‘चोकपॉइंट्स’ में से एक है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है.
होर्मुज के बाद अब इस दक्षिणी समुद्री द्वार पर हूतियों और प्रत्यक्ष रूप से ईरान का प्रभाव बढ़ जाना यह साबित करता है कि वे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के दोनों मुख्य रास्तों को नियंत्रित या बाधित करने की ताकत रखते हैं.
हूती नेतृत्व ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सामान्य अंतरराष्ट्रीय नौवहन और व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता सुरक्षित है, लेकिन सऊदी जहाजों और उनकी संपत्तियों को विशेष रूप से निशाना बनाया जाएगा. हूतियों ने इसे ‘ब्लॉकेड के बदले ब्लॉकेड’ करार दिया है.
ब्रिक्स समिट और भारत की कूटनीतिक परीक्षा
इन ज्वलनशील घटनाओं की पृष्ठभूमि में नई दिल्ली में हो रहा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है. जब खाड़ी के सबसे बड़े देश यानी सऊदी अरब का ऊर्जा निर्यात गंभीर खतरे में हो, उसकी मुख्य पाइपलाइन बंद हो चुकी हो और लाल सागर में हूतियों का दबदबा बढ़ रहा हो, तब ब्रिक्स मंच पर ऊर्जा सुरक्षा, वैकल्पिक भुगतान प्रणाली और सुरक्षित ट्रेड कॉरिडोर पर चर्चा सबसे ऊपर आ गई है.
सऊदी अरब वर्तमान में इस भू-राजनीतिक मोर्चे पर सबसे अधिक दबाव और परेशानी का सामना कर रहा है. एक तरफ उसकी तेल अर्थव्यवस्था पर चौतरफा मार पड़ रही है, और दूसरी तरफ ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों पर रूस, ईरान और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच संतुलन बिठाना उसकी कूटनीति की बड़ी परीक्षा है.
भारत के लिए भी यह एक संवेदनशील समय है, क्योंकि ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालते हुए उसे युद्ध और संघर्षों से घिरे इस माहौल में वैश्विक सप्लाई चेन को टूटने से बचाने और एक मजबूत आम सहमति बनाने के लिए अत्यंत सूक्ष्म कूटनीति का परिचय देना पड़ रहा है.






