इस बड़े मिशन को पूरा करने में भारत की एक प्राइवेट स्पेस कंपनी अहम भूमिका निभाने जा रही है. अमेरिकी स्टार्ट-अप ने अपने दो सैटेलाइट्स को स्पेस में भेजने के लिए हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस के साथ एक बड़ी डील साइन की है. इन दोनों सैटेलाइट्स को स्काईरूट के स्वदेशी विक्रम रॉकेट की मदद से लॉन्च करके धरती की कक्षा में पहुंचाया जाएगा.

रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल स्पेस में ऐसे सैटेलाइट्स का एक पूरा नेटवर्क तैयार कर रही है. जो जरूरत पड़ने पर रात के वक्त किसी भी जगह तुरंत रोशनी पहुंचा सकेगा. इसका सबसे बड़ा फायदा बाढ़ और भूकंप जैसी आपदा से घिरे इलाकों में होगा जहां अंधेरे में भी रेस्क्यू ऑपरेशन आसानी से चल सकेंगे. इसके अलाव रात में धूप मिलने से सोलर पावर प्लांट्स में बिजली बनाने का समय भी बढ़ाया जा सकेगा.

इस डील पर रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल का कहना है कि अमेरिका में तय उनके दूसरे मिशनों के साथ ये दो भारतीय लॉन्च उन्हें एक पक्की टाइमलाइन और एक्स्ट्रा क्षमता देंगे. वहीं स्काईरूट एयरोस्पेस के सीईओ पवन चंदना ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि स्पेस टेक्नोलॉजी से ऑन-डिमांड धूप पहुंचाने के इस अनोखे सपने को अपने रॉकेट से पूरा करने का उन्हें बेसब्री से इंतजार है.

इससे पहले जुलाई में इस अमेरिकी कंपनी को वहां के फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन से अपना पहला टेस्टिंग यानी प्रोटोटाइप सैटेलाइट बनाने और लॉन्च करने की मंजूरी मिली थी. कंपनी का टारगेट धरती के पांच किलोमीटर के दायरे में जरूरत के हिसाब से सूरज की रोशनी पहुंचाना है. आपको बता दें कि इस रोशनी की चमक को कम या ज्यादा किया जा सकेगा और काम खत्म होने पर इसे बंद भी कर सकेंगे.

कंपनी के मुताबिक ऑर्डर पर मिलने वाली इस धूप के कई और बड़े फायदे भी होंगे. इससे दूर-दराज के इंडस्ट्रियल इलाकों में रात के वक्त भी बिना रुकावट देर तक काम किया जा सकेगा. तो इसके साथ ही जरूरी ठिकानों को रोशन करके डिफेंस ऑपरेशंस में सेना को बड़ी मदद मिल सकेगी. इतना ही नहीं किसी बड़े पब्लिक इवेंट या शो को और ज्यादा शानदार बनाने के लिए भी इस रोशनी का इस्तेमाल हो सकेगा.

रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल के सीईओ बेन नोवाक ने स्काईरूट जैसी नई लॉन्च कंपनी के साथ जुड़ने पर काफी उत्साह जताया है. इस डील के मुताबिक कंपनी का पहला सैटेलाइट विक्रम-1 रॉकेट से स्पेस में भेजा जाएगा. वहीं दूसरे सैटेलाइट को स्काईरूट के नए बन रहे विक्रम-1यू रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा. इस नए विक्रम-1य रॉकेट के पहले स्टेज में एक्स्ट्रा बूस्टर लगाए गए हैं. जिससे इसकी क्षमता पहले से काफी बेहतर हो गई है.

वैसे स्पेस से धरती पर रोशनी भेजने की यह कोशिश दुनिया में पहली बार नहीं हो रही है. साल 1993 में रूस के साइंटिस्ट और इंजीनियर्स ने स्पेस की ऑर्बिट में 65 फुट चौड़ा एक बड़ा शीशा लगाकर धरती पर सूरज की रोशनी की किरण भेजी थी. जनामया नाम का वह एक्सपेरिमेंट पूरी तरह कामयाब रहा था. लेकिन बाद में पैसों की कमी की वजह से इस प्रोजेक्ट को आगे नहीं बढ़ाया जा सका.

हालांकि रात में धूप बेचने के इस प्लान पर अब विवाद भी शुरू हो गया है और कई पर्यावरण संगठनों ने एफसीसी से इसकी मंजूरी रद्द करने की मांग की है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि रात में स्पेस से आने वाली तेज रोशनी से जंगली जानवरों, स्पेस रिसर्च और इंसानों की बायोलॉजिकल क्लॉक को नुकसान हो सकता है. वहीं सीईओ नोवाक का कहना है कि वे साइंटिस्ट और लोकल कम्युनिटी के साथ मिलकर ही आगे बढ़ेंगे.
Published at : 16 Oct 2026 07:21 PM (IST)






