देश में एक और जहां चीनी की कीमत बढ़ने की खबरें आ रही थीं. तो वहीं अब प्याज के साथ भी यह सिलसिला शुरू हो गया है. कुछ दिनों पहले तक जो प्याज आम आदमी 35-40 रुपये प्रति किलो मिल रही थी. वह अचानक 50 से 60 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई है. कई शहरों के अलग-अलग इलाकों और सुपरमार्केट्स में बढ़े हुए रेट्स पर प्याज बेची जा रही है.
घर में खाना बनाने को लेकर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीजों में प्याज आती है. प्याज का यू महंगा हो जाना आम आदमी के घर का बजट जरूर बिगाड़ सकता है. लेकिन जहां प्याज महंगी होने से आम आदमी को परेशानी हो रही है. तो वहीं किसानों के लिए यह खुशी की बात मानी जा रही है. अब उनकी आमदनी में और इजाफा हो सकता है. प्याज की बढ़ती कीमत के बीच चलिए अब बताते हैं कि किसानों को एक किलों प्याज पर कितना मुनाफा मिलता है.
1 किलो प्याज उगाने में कितना खर्च आता है?
किसानों को एक किलो प्याज से होने वाले मुनाफे को जानने के लिए उससे पहले यह जानना होगा कि प्याज उगाने में कितना खर्चा आता है. एक किलो प्याज तैयार करने के पीछे खेत की जुताई, अच्छे बीज, खाद, कीटनाशक, पानी की सिंचाई और सबसे ज्यादा लेबर का खर्च जुड़ा होता है. आज के वक्त में डीजल और मजदूरी के दाम इतने बढ़ चुके हैं कि एक एकड़ में प्याज की पूरी फसल तैयार करने में आराम से 50000 से 70000 रुपये लग जाते हैं.
अगर मौसम ने पूरा साथ दिया और फसल एकदम सही रही तब जाकर किसान की लागत करीब 16 से 22 रुपये प्रति किलो बैठती है. इसमें बेमौसम बारिश ज्यादा गर्मी या बीमारी लगने का रिस्क शामिल नहीं है. अगर मौसम खराब हुआ और पैदावार घटी तो यही लागत 25 से 28 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है. यानी मंडी ले जाने से पहले ही किसान का 20 रुपये के आसपास खर्च हो चुका होता है.
1 किलो में किसान को कितना फायदा?
जब आप किसी लोकल दुकान या ठेले से 60 रुपये किलो प्याज खरीदते हैं. तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि किसान को भी वही रेट मिला है. किसान जब अपनी ट्रॉली लेकर थोक मंडी जाता है. तो उसे औसतन 25 से 32 रुपये प्रति किलो का ही रेट मिल पाता है. अपनी 20 रुपये की लागत निकालने के बाद किसान के हाथ में 1 किलो प्याज पर सिर्फ 5 से 10 रुपये का मुनाफा बचता है.
कई बार क्वालिटी के नाम पर उसका माल और भी सस्ते में बिक जाता है. अब सवाल है कि बाकी के 28 से 35 रुपये कहां गए. तो यह पैसा ट्रांसपोर्ट का किराया, बोरियों की लोडिंग-अनलोडिंग, मंडी की फीस, रास्ते में प्याज के सूखने या खराब होने का नुकसान और रिटेल दुकानदार के अपने मार्जिन में बंट जाता है.

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किन्हें होता है सबसे ज्यादा फायदा?
प्याज के बढ़ते दामों में सबसे ज्यादा फायदा उन बड़े ट्रेडर्स को होता है जिनके पास बड़े स्टोरेज और महीनों तक स्टॉक होल्ड करने की कैपेसिटी होती है. देश का ज्यादातर छोटा किसान फसल कटते ही अपनी उधारी चुकाने और अगली फसल के लिए पैसे जुटाने के चक्कर में 12 से 16 रुपये किलो में ही सारा माल तुरंत बेच देता है. उसके पास प्याज को सुरक्षित रखने के लिए वेयरहाउस नहीं होते.
और बाद में जब यह प्याज बड़े ट्रेडर्स के पास पहुंच जाता है और मार्केट में नई सप्लाई कम होती है. तब डिमांड बढ़ने पर कीमतें 60 से 70 रुपये तक पहुंच जाती हैं. यानी जब दाम अपने पीक पर होते हैं, तब किसान के पास बेचने के लिए प्याज बचा ही नहीं होता. नतीजा यह निकलता है कि महंगे प्याज के दौर में भी असली उगाने वाले को बहुत मुनाफा ही मिलता है. जबकि ड़े ट्रेडर्स अच्छी कमाई कर जाते हैं.
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