किसान खेती के साथ अब भैंस पालन अपनाकर भी अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं. हालांकि, शुरुआत से पहले पशुपालन का प्रशिक्षण लेना और पशुओं की देखभाल की सही जानकारी होना जरूरी है.

मुर्रा भैंस दूध उत्पादन के लिए लोकप्रिय नस्ल है. यह औसतन रोजाना 10 से 20 लीटर तक दूध दे सकती है. इसकी पहचान काले रंग, घुमावदार सींग और मजबूत शरीर से होती है.

भदावरी भैंस उत्तर भारत के कुछ इलाकों में पाली जाती है. यह रोजाना करीब 5 से 8 लीटर दूध देती है. इसके दूध में वसा की अच्छी मात्रा होती है, इसलिए डेयरी व्यवसाय में इसे उपयोगी माना जाता है.

तराई नस्ल की भैंस लखीमपुर खीरी जैसे तराई क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल मानी जाती है. इसका औसत दूध उत्पादन एक ब्यांत में लगभग 1,030 किलोग्राम बताया गया है.

नीली रावी भैंस भी दूध उत्पादन के लिए जानी जाती है. यह एक ब्यांत में करीब 1,800 से 3,000 लीटर तक दूध दे सकती है. इसकी खास पहचान आंखों और शरीर के कुछ हिस्सों पर सफेद निशान हैं.

भैंसों की अच्छी सेहत और दूध उत्पादन के लिए संतुलित आहार, साफ पानी, सूखा और स्वच्छ पशुशाला, समय पर टीकाकरण और नियमित देखभाल जरूरी है. गोबर से जैविक खाद और वर्मी कंपोस्ट बनाकर किसान खेती में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं या अतिरिक्त आमदनी का जरिया बना सकते हैं.
Published at : 14 Oct 2026 06:28 PM (IST)
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