मैच फिक्सिंग और स्पॉट फिक्सिंग में क्या अंतर होता है?

मैच फिक्सिंग और स्पॉट फिक्सिंग में क्या अंतर होता है?


क्रिकेट में फिक्सिंग का नाम आते ही अक्सर दो शब्द सुनने को मिलते हैं. पहला मैच फिक्सिंग और दूसरा स्पॉट फिक्सिंग. कई लोग इन दोनों को एक ही मान लेते हैं, जबकि दोनों का तरीका और मकसद अलग होता है. हालांकि दोनों ही खेल की निष्पक्षता के खिलाफ हैं और इन्हें गंभीर अपराध माना जाता है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि दोनों के बीच क्या अंतर है.

क्या होती है मैच फिक्सिंग?

मैच फिक्सिंग का सीधा संबंध मुकाबले के अंतिम नतीजे से होता है. इसमें पहले से तय कर लिया जाता है कि कौन सी टीम जीतेगी और कौन सी टीम हार जाएगी. इसके लिए खिलाड़ी जानबूझकर खराब प्रदर्शन करते हैं ताकि मैच का परिणाम पहले से तय योजना के मुताबिक रहे. इस तरह की फिक्सिंग में कई बार एक से अधिक खिलाड़ी या पूरी टीम के सदस्य भी शामिल हो सकते हैं. इसका उद्देश्य पूरे मुकाबले का नतीजा बदलना होता है.

उदाहरण: साल 2000 में दक्षिण अफ्रीका के तत्कालीन कप्तान हेंसी क्रोनिए पर भारत के खिलाफ सीरीज के दौरान मैच फिक्सिंग के आरोप लगे थे. बाद में उन्होंने आरोप स्वीकार किए, जिसके बाद उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया.

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स्पॉट फिक्सिंग क्या होती है?

स्पॉट फिक्सिंग में पूरे मैच का नतीजा तय नहीं किया जाता. इसमें मैच के किसी खास पल या घटना को पहले से तय किया जाता है. जैसे किसी ओवर में कितने रन बनेंगे, कोई खिलाड़ी कब नो बॉल करेगा, कब वाइड गेंद डालेगा या किसी विशेष गेंद पर क्या होगा. इस तरह की फिक्सिंग में आमतौर पर एक या दो खिलाड़ी ही शामिल होते हैं. बदले में उन्हें बुकी से पैसे मिलते हैं. मैच का परिणाम कुछ भी हो सकता है, लेकिन तय घटना वैसी ही होती है जैसा पहले से तय किया गया होता है.

उदाहरण: साल 2010 में लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान पाकिस्तान के तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर ने जानबूझकर नो बॉल फेंकी थी. यह स्पॉट फिक्सिंग का चर्चित मामला बना. इस प्रकरण में मोहम्मद आसिफ और तत्कालीन कप्तान सलमान बट भी दोषी पाए गए. आमिर पर पांच साल का प्रतिबंध लगाया गया.

मैच फिक्सिंग और स्पॉट फिक्सिंग में मुख्य अंतर

मैच फिक्सिंग का मकसद पूरे मुकाबले का नतीजा बदलना होता है, जबकि स्पॉट फिक्सिंग में केवल किसी खास घटना या पल को प्रभावित किया जाता है. दोनों ही मामलों में खिलाड़ियों की ईमानदारी पर सवाल उठते हैं और क्रिकेट की साख को नुकसान पहुंचता है. इसी वजह से ICC और सभी क्रिकेट बोर्ड ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करते हैं.

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