एक तरफ केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का बेसब्री से इंतजार है. इस बीच, भारतीय रेलवे ने कारोबारी साल 2025-26 में नॉन-गजेटेड कर्मचारियों के लिए सैलरी हाइक का ऐलान कर दिया है.
रेलवे बोर्ड ने बुधवार को प्रोडक्शन यूनिट्स के जनरल मैनेजरों सहित अपने सभी कर्मचारियों को भेजे एक पत्र में कहा है कि RPF/RPSF कर्मियों को छोड़कर सभी पात्र नॉन-गजेटेड रेलवे कर्मचारियों वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ‘प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस’ (PLB) के तौर पर 17,951 रुपये मिलेंगे. बोर्ड ने यह भी कहा कि बोनस का पेमेंट सैलरी के पेमेंट की तरह ही प्रायोरिटी बेसिस पर किया जाएगा.
अब त्योहारी सीजन से पहले रेलवे कर्मचारियों के लिए तो बोनस का ऐलान कर दिया गया है, लेकिन केंद्र सरकार के दूसरे कर्मचारियों के लिए इसकी घोषणा अभी तक नहीं हुई है. हालांकि, दूसरे केंद्रीय कर्मचारियों के मुकाबले रेलवे में काम करने वाले कर्मचारियों को मिलने वाले बोनस में अंतर होता है.
जहां रेलवे कर्मचारियों को 17,591 रुपये का बोनस मिलता है. वहीं, दूसरें केंद्रीय कर्मचारियों को बोनस के तौर पर सिर्फ 6,908 रुपये ही मिलते हैं. अब सवाल आता है कि दोनों में इतना बड़ा अंतर क्यों है? आइए जानते हैं.
क्यों रेलवे कर्मचारियों को मिलता है ज्यादा बोनस?
रेलवे समेत सभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 7,000 रुपये की वेज सीलिंग पर सालाना बोनस मिलता है. अंतर सिर्फ दिनों का है. रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिनों के हिसाब से बोनस तय किया जाता है, जबकि दूसरे कर्मचारियों को 30 दिनों के आधार पर बोनस मिलता है.
रेलवे कर्मचारियों को 78 दिनों का बोनस क्यों?
भारतीय रेलवे सरकार का एक कमर्शियल और ऑपरेश्नल संगठन है, जो बड़े पैमाने पर रेवेन्यू जनरेट करता है. रेलवे कर्मचारी दिन-रात काम कर मालगाड़ियों में माल ढुलाई और बड़ी संख्या में यात्रियों को सेवा देकर सरकार को कमाई कराती है. इस वजह से त्योहार के मौके पर इन्हें बोनस के तौर पर 78 दिनों की एक्स्ट्रा सैलरी दी जाती है.
दरअसल, साल 1979-80 में AIRF और NFIR जैसे रेल यूनियनों ने देशव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी थी. उनका कहना है कि रेलकर्मी हर मौसम और परिस्थिति में दिन-रात काम कर सरकार की कमाई कराते हैं इसलिए बोनस मिलना उनका हक है.
यहीं से रेलवे कर्मचारियों के लिए परफॉर्मेंस के आधार पर बोनस देने का सिस्टम शुरू हुआ.1979 में जब इसे शुरू किया गया, तो बेस ईयर 1977-78 को माना गया. उस दौरान रेलवे को परफॉर्मेंस के बदले 100 पॉइंट मिले, तो कर्मचारियों के लिए 25 दिन का बोनस मिलना तय हुआ. वक्त बीतने के साथ-साथ रेलवे के परफॉर्मेंस में भी गजब का सुधार आया.
अब भारतीय रेलवे कमाई के मामले में रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड तोड़ रही है. यात्रियों की संख्या हो या माल ढुलाई से होने वाली कमाई, इनका प्रोडक्टिविटी इंडेक्स 300 पॉइंट के भी पार चला गया है. इसे ही तय फॉर्मूले पर डाले जाने पर 78 दिन का बोनस बनता है.
बाकी कर्मचारियों के लिए फिर 30 दिन क्यों?
केंद्रीय सचिवालय से लेकर आयकर विभाग और दूसरे प्रशासनिक कार्यालयों के कर्मचारी गैर-वाणिज्यिक (Non-Commercial) श्रेणी में आते हैं. इनका काम प्रशासनिक और कागजी होता है, कमाई कराने वाला नहीं इसलिए यहां प्रोडक्टिविटी का कोई हिसाब-किताब नहीं है. इस वजह से इनके लिए सिर्फ 30 दिन के हिसाब से ही बोनस तय किया जाता है.
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