लोन के साथ जबरन बीमा नहीं बेच पाएंगे बैंक, कमीशन भी घटेगा

लोन के साथ जबरन बीमा नहीं बेच पाएंगे बैंक, कमीशन भी घटेगा


बीमा पॉलिसी बेचने से होने वाली कमाई बैंकों के लिए आमदनी का एक अहम जरिया है, लेकिन अब इस कारोबार में बदलाव की संभावना बढ़ रही है. बीमा नियामक IRDAI के नए प्रस्ताव से बैंकों को मिलने वाले कमीशन पर असर पड़ सकता है. ऐसे में बैंक म्यूचुअल फंड, विदेशी मुद्रा कारोबार और दूसरी वित्तीय सेवाओं के जरिए अपनी कमाई को बनाए रखने की रणनीति बना रहे हैं.

बंधन बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ पार्थ प्रतिम सेनगुप्ता के मुताबिक, प्रस्ताव लागू होने पर बैंक की सालाना थर्ड पार्टी प्रोडक्ट से होने वाली आय में करीब 200 करोड़ रुपये की कमी आ सकती है. बैंक अब म्यूचुअल फंड वितरण, होलसेल बैंकिंग, ट्रेड फाइनेंस और विदेशी मुद्रा सेवाओं से कमाई बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है. छोटे शहरों में बीमा वितरण बढ़ाने की योजना भी है.

क्या है IRDAI का नया प्रस्ताव?

भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा वितरण से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव के लिए एक परामर्श पत्र जारी किया है. इसमें अलग-अलग बीमा उत्पादों और उन्हें बेचने वाले माध्यमों के हिसाब से कमीशन की सीमा तय करने का प्रस्ताव है. बीमा कंपनियों के प्रबंधन और वितरण खर्च की सीमा में बदलाव की भी बात कही गई है. इसका असर उन बैंकों पर पड़ सकता है, जो ग्राहकों को जीवन, स्वास्थ्य और सामान्य बीमा पॉलिसियां बेचकर कमीशन कमाते हैं.

AU और IDFC FIRST बैंक की रणनीति

AU स्मॉल फाइनेंस बैंक विदेशी मुद्रा कारोबार, क्रेडिट कार्ड और ट्रेड फाइनेंस से आय बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. वहीं, IDFC FIRST बैंक विदेशी मुद्रा जमा पर फंडिंग लागत में बचत, ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी और प्रोडक्ट एजेंसी कारोबार के विस्तार से नुकसान को सीमित करना चाहता है.

एक्सिस बैंक को बिक्री बढ़ने की उम्मीद

एक्सिस बैंक कमीशन में संभावित गिरावट की भरपाई के लिए बीमा पॉलिसियों की बिक्री बढ़ाने और उत्पादों के मिश्रण में बदलाव करने पर विचार कर रहा है. बैंक का मानना है कि यदि बीमा की कीमतें कम होती हैं, तो अधिक ग्राहक पॉलिसियां खरीद सकते हैं. इससे बिक्री की संख्या बढ़ने पर कमीशन में कटौती का कुछ असर कम हो सकता है.

HDFC बैंक कर रहा है आकलन

HDFC बैंक भी प्रस्ताव के प्रभाव का आकलन कर रहा है. बैंक का मानना है कि कमीशन में प्रस्तावित कटौती काफी बड़ी है. हालांकि, बीमा की लागत कम होने से ग्राहकों की संख्या बढ़ने और पॉलिसियों के लंबे समय तक जारी रहने की संभावना भी देखी जा रही है. फिलहाल ये बदलाव प्रस्ताव के स्तर पर हैं. अंतिम नियम आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि बैंकों की कमाई पर कितना असर पड़ेगा.

सरकारी बैंकों पर भी पड़ सकता है असर

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के मुताबिक, प्रस्ताव लागू होने पर उसकी बीमा वितरण से होने वाली फीस लगभग 33 प्रतिशत घट सकती है. वहीं, केनरा बैंक ने जीवन बीमा वितरण आय पर सालाना 120 से 145 करोड़ रुपये के संभावित असर का अनुमान लगाया है. बैंक के अनुसार, सभी वितरण कारोबारों को मिलाकर प्रभाव 200 करोड़ रुपये से अधिक नहीं रहने की उम्मीद है.

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