Property Rights: किसी की मौत के बाद यदि कोई विवाद सबसे ज्यादा सामने आता है, तो वो है प्रॉपर्टी का विवाद. इसके लिए अपने, अपनों के ही दुश्मन तक बन जाते हैं. कई लोग इसके नियमों को भी नहीं जानते हैं, केवल सुनी- सुनाई बातों पर ही भरोसा करते हैं और आपस में ही झगड़ते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर के मुखिया की मौत हो जाए और उन्होंने कोई वसीयत भी ना बनाई हो, तब उनकी प्रॉपर्टी का वारिस कौन होता है?
कौन होगा असली वारिस?
यदि घर के मुखिया का आकस्मिक निधन हो जाता है और वो अपनी वसीयत नहीं बना पाता है, तब प्रॉपर्टी का असली मालिक कौन होता है? ये सवाल कई लोगों के मन में होता है, इस सवाल का जवाब आज आपको बताते हैं. दरअसल हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 8 के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति की बिना वसीयत बनाए ही मृत्यु हो जाती है, तो उसकी सारी संपत्ति उसके कानूनी वारिसों को दी जाती है. यदि घर के मुखिया की मृत्यु हो जाती है तो उसकी पत्नी, बेटा और बेटी तीनों के बीच बराबरी से सम्पत्ति बांट दी जाती है. जिनमें से हर एक को संपत्ति का एक तिहाई हिस्सा मिलता है.
वसीयत बनाने के बाद मृत्यु हो तब?
यदि कोई व्यक्ति मृत्यु के पहले ही अपनी वसीयत बनाकर जाता है तो उसे, उसी अनुसार फॉलो किया जाता है. भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 के मुताबिक कोई व्यक्ति अपनी पूरी या आधी संपत्ति किसी को भी दे सकता है. यहां तक कि अजनबियों या किसी ट्रस्ट को भी वसीयत के जरिए अपनी प्रॉपर्टी दे सकता है. वसीयत को वैध मानने के लिए उस पर वसीयतकर्ता के हस्ताक्षर होना चाहिए और कम से कम दो व्यक्ति गवाह के रूप में होना चाहिए. जिन्हें भले ही ये ना पता हो कि वसीयत में लिखा क्या है. वसीयत का पंजीकरण जरूर होना चाहिए, इससे ये वैध मानी जाती है और इसे लेकर कोई विवाद नहीं होता.






