वेनेजुएला और ईरान के बाद क्यूबा की बारी क्यों? अमेरिकी हमले के डर से गोरिल्ला युद्ध सीख रहे लोग

वेनेजुएला और ईरान के बाद क्यूबा की बारी क्यों? अमेरिकी हमले के डर से गोरिल्ला युद्ध सीख रहे लोग


ईरान के बाद अब अमेरिका का अगला निशाना क्यूबा हो सकता है. ये कोई अफवाह नहीं, बल्कि खुद क्यूबा सरकार की तरफ से आने वाले संकेत हैं. सरकार ने अपने लोगों से साफ कह दिया है- ‘जंग के लिए तैयार रहो.’ देश भर में आम नागरिकों को गुरिल्ला युद्ध की ट्रेनिंग दी जा रही है. आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि एक छोटा सा कैरेबियाई देश, जो अमेरिका से महज 145 किलोमीटर दूर है, अपनी पूरी आबादी को जंग के लिए तैयार करने लगा?

CIA प्रमुख के दौरे ने बजा दी खतरे की घंटी

तनाव की सबसे बड़ी वजह है 15 मई 2026 को अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ का अचानक क्यूबा की राजधानी हवाना पहुंचना. ये कोई आम दौरा नहीं था. 1959 की क्यूबाई क्रांति के बाद से किसी CIA प्रमुख का क्यूबा जाना अपने आप में बेहद चौंकाने घटना मानी जा रही है. क्यूबा के लोगों के लिए तो CIA का नाम ही सालों की दुश्मनी और साजिशों का निशान है. क्यूबा की राजधानी हवाना में एक म्यूजियम तक है, जो पिछले कई दशकों में CIA के कुख्यात कारनामों से भरा पड़ा है. फिदेल कास्त्रो को मारने के लिए धमाका करने वाला सिगार बनाने से लेकर जहर मिले स्कूबा सूट तक की साजिशें वहां दर्ज हैं. ऐसे में उसी एजेंसी के मुखिया का हवाना में उतरना किसी चेतावनी से कम नहीं था.

14 मई को हवाना में CIA प्रमुख जॉन रैटक्लिफ ने क्यूबाई अधिकारियों के साथ बैठक की

रैटक्लिफ के इस दौरे का वक्त भी बेहद अहम है. ये ऐसे समय पर हुआ जब क्यूबा अपने इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक और मानवीय संकट से जूझ रहा है. क्यूबा के ऊर्जा मंत्री विसेंते डे ला ओ लेवी ने राजकीय टेलीविजन पर साफ कह दिया कि देश के पास तेल का कोई भंडार नहीं बचा है. उन्होंने कहा, ‘नाकेबंदी का असर वाकई हमें बहुत नुकसान पहुंचा रहा है क्योंकि हमें अब भी ईंधन नहीं मिल रहा है.’ हालात ऐसे हैं कि पूर्वी क्यूबा समेत पूरे देश में लगातार 30 घंटे तक बिजली गुल रहती है, जिसके चलते लोग सड़कों पर उतरकर बर्तन पीट-पीटकर विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर हो गए हैं.

CIA ने बाद में एक बयान जारी कर बताया कि रैटक्लिफ ने क्यूबाई अधिकारियों को साफ संदेश दिया, ‘क्यूबा अब इस गोलार्ध में हमारे दुश्मनों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं रह सकता.’ उन्होंने ये भी कहा कि अमेरिका आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों पर गंभीरता से बातचीत को तैयार है, लेकिन इसके लिए क्यूबा को ‘बुनियादी बदलाव’ करने होंगे.

ड्रोन विवाद: क्यूबा खतरा है या अमेरिका का बहाना?

इसी दौरे के कुछ ही दिनों बाद अमेरिकी मीडिया में एक धमाकेदार खबर आई. 17 मई 2026 को एक्सिओस नाम की न्यूज वेबसाइट ने अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के हवाले से दावा किया कि क्यूबा ने रूस और ईरान से 300 से ज्यादा सैन्य ड्रोन खरीदे हैं. इतना ही नहीं, रिपोर्ट में कहा गया कि क्यूबा ने इन ड्रोन का इस्तेमाल करके अमेरिकी नौसैनिक अड्डे ग्वांतानामो बे, अमेरिकी युद्धपोतों और यहां तक कि फ्लोरिडा के की वेस्ट पर हमला करने की योजनाओं पर चर्चा भी शुरू कर दी है. यानी अमेरिका की सरजमीं महज 145 किलोमीटर की दूरी से खतरे में आ सकती है.

रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया, ‘जब आप सोचते हैं कि इतनी करीबी पर इस तरह की तकनीक मौजूद है और आतंकी समूहों से लेकर ड्रग कार्टेल, ईरानियों और रूसियों तक जैसे खतरनाक लोग इसका इस्तेमाल कर सकते हैं, तो ये चिंता की बात है. ये एक बढ़ता हुआ खतरा है.’

हालांकि, खुद इसी रिपोर्ट में ये भी साफ कहा गया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि क्यूबा कोई तत्काल हमला करने वाला है या वो सक्रिय रूप से ऐसी योजना बना रहा है. इसके बावजूद, ये रिपोर्ट ऐसे वक्त पर आई जब दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर है, जिससे ये आशंका बढ़ गई है कि अमेरिका क्यूबा के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए जमीन तैयार कर रहा है.

क्यूबा ने इस रिपोर्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. क्यूबा के उप-विदेश मंत्री कार्लोस फर्नांडीज डी कोसियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘क्यूबा पर सैन्य हमले को सही ठहराने के लिए विरोधी अभियान हर घंटे तेज किया जा रहा है. इसके लिए लगातार बेतुके आरोप लगाए जा रहे हैं. अमेरिका हमलावर है. क्यूबा हमले का शिकार देश है और आत्मरक्षा में काम कर रहा है.’

विदेश मंत्री ब्रूनो रॉड्रिग्ज ने भी X पर कहा, ‘बिना किसी जायज कारण के अमेरिकी सरकार दिन-ब-दिन क्यूबाई लोगों के खिलाफ एक क्रूर आर्थिक जंग और एक संभावित सैन्य आक्रमण को सही ठहराने के लिए एक फर्जी मामला गढ़ रही है. क्यूबा न तो धमकी देता है और न ही जंग चाहता है.’

रूस और चीन का कनेक्शन: अमेरिका की असली चिंता

अमेरिका की असली चिंता सिर्फ ड्रोन नहीं हैं, बल्कि क्यूबा में रूस और चीन की बढ़ती सैन्य और खुफिया मौजूदगी है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, रूस और चीन के सिग्नल इंटेलिजेंस सेंटर क्यूबा में पहले से सक्रिय हैं और लगातार काम कर रहे हैं. रिपोर्टों में ये भी कहा गया है कि हाल के महीनों में क्यूबा ने रूस से और ज्यादा ड्रोन और सैन्य उपकरण मांगे हैं.

ये भी दावा किया गया है कि यूक्रेन युद्ध में हजारों क्यूबाई सैनिक रूसी सेना के साथ लड़ रहे हैं, जिससे उन्हें आधुनिक ड्रोन युद्ध का अनुभव मिला है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये अनुभवी सैनिक अब क्यूबा लौट रहे हैं और ड्रोन तकनीक में महारत हासिल कर रहे हैं.

वेनेजुएला से शुरू हुई क्यूबा की मुसीबत

क्यूबा की मौजूदा मुसीबत की जड़ पिछले साल जनवरी 2026 में पड़ी, जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के सत्ताधारी निकोलस मादुरो को सत्ता से हटा दिया. वेनेजुएला क्यूबा का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता और करीबी सहयोगी था. मादुरो के हटते ही अमेरिका ने क्यूबा पर एक क्रूर आर्थिक नाकेबंदी लगा दी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी 2026 में एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर क्यूबा को ‘अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा’ घोषित किया और किसी भी देश को क्यूबा को तेल बेचने पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी.

वेनेजुएला एक तरह से क्यूबा के लिए सीढ़ी का काम कर रहा था. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने पहले से ही क्यूबा को अपने निशाने पर ले रखा था. नेशनल सिक्योरिटी आर्काइव के सीनियर रिसर्चर पीटर कोर्नब्लुह ने न्यूजवीक को बताया, ‘मुझे लगता है कि क्यूबा एक ऐसा निशाना था जिसकी योजना वेनेजुएला पर हमले से पहले ही बन चुकी थी. फिर वेनेजुएला को क्यूबा तक पहुंचने की सीढ़ी के रूप में देखा गया.’

ट्रंप की ‘गाजर और छड़ी’ वाली नीति

दिलचस्प बात ये है कि इतनी सख्ती के बावजूद ट्रंप प्रशासन एक अजीबोगरीब दोहरी रणनीति अपना रहा है. एक तरफ तो वो क्यूबा को आर्थिक रूप से तबाह करने पर तुला है, वहीं दूसरी तरफ मदद का हाथ भी बढ़ा रहा है. विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा को 10 करोड़ डॉलर की मानवीय सहायता का प्रस्ताव दिया है, लेकिन एक शर्त के साथ कि ये मदद कैथोलिक चर्च के जरिए बांटी जाएगी, क्यूबा सरकार के जरिए नहीं.

खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने 16 मई 2026 को फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ये तक कहा कि क्यूबा को ‘हमारे पास आना ही होगा’ और ये कि वो क्यूबा का रुख मोड़कर उसे रूस और चीन से दूर अमेरिका के करीब ला सकते हैं. उन्होंने क्यूबा को ‘पूरी तरह से विफल राष्ट्र’ करार देते हुए कहा कि क्यूबा को मदद की जरूरत है. विदेश मामलों के जानकार और JNU के रिटायर्ड प्रोफेसर ए. के. पाशा इसे ‘गाजर और छड़ी’ की नीति बता रहे हैं. साथ ही, अमेरिका ने क्यूबा के 94 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर 1996 में दो मानवीय विमानों को मार गिराने के मामले में आपराधिक मुकदमा चलाने की भी तैयारी कर ली है.

क्यूबा की तैयारी: पूरे देश की जनता की जंग का ऐलान

इन तमाम धमकियों के बीच, क्यूबा खामोश नहीं बैठा है. सरकार ने फिदेल कास्त्रो के जमाने की ‘ग्वेरा डे टोडो एल पुएब्लो’ नामक सैन्य रणनीति को फिर से जिंदा कर दिया है. ये एक ऐसी रक्षात्मक रणनीति है, जिसमें किसी बड़े बाहरी हमले की स्थिति में देश के सभी लोगों और फिजिकल रिसोर्सेज को पूरी तरह झोंक दिया जाता है.

इसी रणनीति के तहत पूरे क्यूबा में आम नागरिकों को गुरिल्ला युद्ध की ट्रेनिंग दी जा रही है. सरकारी टेलीविजन पर ऐसे वीडियो दिखाए जा रहे हैं, जिनमें आम लोग- बुजुर्ग, महिलाएं, यहां तक कि छात्र भी सैन्य अभ्यास करते नजर आ रहे हैं. कुछ वीडियो में सैनिक पुराने सोवियत हथियारों से अभ्यास करते दिखे, जबकि एक वीडियो में तो एंटी-एयरक्राफ्ट गन को बैलगाड़ी से खींचते हुए दिखाया गया. क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने खुद अमेरिकी नाकेबंदी के खिलाफ मार्च निकाला.

सैन्य इतिहासकारों का मानना है कि भले ही क्यूबा के पास आधुनिक हथियारों की भारी कमी है, लेकिन उसकी सेना और जनता मिलकर अमेरिकी हमले का लंबा और कड़ा प्रतिरोध कर सकती है.

तो क्या सचमुच क्यूबा पर अमेरिका हमला करेगा?

ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने 8 मई 2026 को ट्रंप से मुलाकात के बाद दावा किया कि ट्रंप का ‘क्यूबा पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है.’ लेकिन सच्चाई ये है कि ट्रंप पहले भी कई बार कह चुके हैं कि वेनेजुएला और ईरान के बाद ‘क्यूबा अगला है.’ अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कांग्रेस की सुनवाई में क्यूबा की अमेरिका से करीबी और वहां विदेशी खुफिया ठिकानों की मौजूदगी को अमेरिकी सुरक्षा के लिए लगातार जोखिम बताया.

ए. के. पाशा का मानना है कि क्यूबा एक अंधेरी सुरंग में फंसा हुआ है. एक तरफ अमेरिकी नाकेबंदी से उसकी अर्थव्यवस्था चरमरा चुकी है- बिजली नहीं, ईंधन नहीं, दवा और खाने की कमी. तो दूसरी तरफ सैन्य हमले का खतरा लगातार मंडरा रहा है.’ क्यूबा के एक स्कूल टीचर ने रॉयटर्स से कहा, ‘अगर वो राउल (कास्त्रो) पर मुकदमा चलाएंगे, तो हम लाठी-पत्थरों से भी क्यूबा की रक्षा करेंगे.’





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