Highest Milk Yielding Cow: अगर आप डेयरी शुरू करने की योजना बना रहे हैं या फिर पहले से ही पशुपालन कर रहे हैं, तो उत्तर प्रदेश सरकार की नई पहल आपके लिए बड़ा अवसर साबित हो सकती है. राज्य सरकार ने नंद बाबा दुग्ध मिशन और मुख्यमंत्री गौ संवर्धन योजना के तहत स्वदेशी गायों के पालन को बढ़ावा देने के लिए अनुदान की व्यवस्था की है.
इस योजना में ज्यादा दूध देने वाली देसी नस्लों की गाय खरीदने पर पशुपालकों को आर्थिक सहायता दी जाएगी. सरकार का उद्देश्य दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और किसानों की आय को मजबूत करना है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि गाय की कौन सी टॉप तीन नस्ल सबसे ज्यादा दूध देती है और इन्हें अगर आप खरीदने जा रहे हैं तो बंपर सब्सिडी कैसे मिलेगी.
कौन सी गायों पर मिलेगी बंपर सब्सिडी?
उत्तर प्रदेश सरकार की नंद बाबा दुग्ध मिशन और मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ समर्थन योजना के तहत गिर, साहीवाल, थारपारकर और हरियाणा जैसी ज्यादा दूध देने वाली देसी नस्लों की गाय खरीदने पर पशुपालकों को आर्थिक सहायता दी जाएगी. इस योजना के तहत पशुपालक के दो दुधारू स्वदेशी गाय की यूनिट खरीद सकते हैं. इसके लिए कुल लागत का अधिकतम 40 प्रतिशत या 80 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा. योजना का लाभ लेने के लिए खरीदी जाने वाली गाय पहले या दूसरी ब्याता होनी चाहिए ताकि पशुपालकों को ज्यादा दूध देने वाली स्वस्थ गाय मिल सके. इसके अलावा कुछ योजनाओं के तहत बड़े डेयरी प्रोजेक्ट स्थापित करने पर परियोजना का लाभ 50 प्रतिशत तक अधिकतम 11.80 लख रुपये तक की सहायता का प्रावधान भी किया गया है. इसका उद्देश्य ज्यादा संख्या में आधुनिक डेयरी इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा देना है.
डेयरी के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है ये तीन नस्लें
गिर गाय
गिर गाय देश की लोकप्रिय दुधारू देसी नस्लों में शामिल है. इसका मूल स्थान गुजरात का गिर क्षेत्र है. यह नस्ल सामान्य तौर पर रोजाना 8 से 10 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है. इसकी पहचान पीछे की ओर झुके हुए माथे, मुड़े हुए सींग और धब्बेदार शरीर से होती है. बाजार में इसके उत्पादन की मांग ज्यादा रहती है, जिससे पशुपालकों को बेहतर कीमत मिल सके.
साहीवाल गाय
साहिवाल को भारत की सबसे ज्यादा दूध देने वाली देसी नस्लों में गिना जाता है. यह लाल भूरे रंग की होती है और रोजाना लगभग 10 से 16 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है. एक ब्यांत में यह करीब 2000 से 3000 लीटर तक दूध उत्पादन कर सकती है. अच्छी देखभाल और संतुलित आहार पर यह डेयरी व्यवसाय के लिए सबसे लाभदायक नस्लों में से एक मानी जाती हैं.
थारपारकर गाय
थारपारकर नस्ल अभी दूध उत्पादन और अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में अनुकूल क्षमता के लिए जानी जाती है. यह नस्ल कम संसाधनों में भी बेहतर प्रदर्शन करती है और उत्तर भारत के कई लोगों में डेयरी व्यवसाय के लिए उपयुक्त मानी जाती है. सरकार ने इससे भी योजना के तहत शामिल किया है, ताकि पशुपालक उन्नत देसी नस्लों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित हो.
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