समंदर में खड़े हैं तेल के टैंकर, भारत के करीब मंडरा रहे ईरानी जहाज, क्या खरीदेगी सरकार?

समंदर में खड़े हैं तेल के टैंकर, भारत के करीब मंडरा रहे ईरानी जहाज, क्या खरीदेगी सरकार?


Crude Oil: ईरान और यूएस के बीच फरवरी से चलता आ रहा युद्ध अब खत्म हो गया है. इस युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ब्लॉक था. यहां से कच्चे तेल की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. जिसके बाद भारत समेत अन्य कई देशों में कच्चे तेल की किल्लतें देखने को मिली थीं. हालांकि अब युद्ध खत्म होने के साथ ही तेल संकट भी खत्म हो गया है. इसी के चलते अब ईरान अपना कच्चा तेल भारत को बेचना चाहता है. आइये जानते हैं क्या है पूरी खबर.

ईरान के पास पड़ा है कच्चा तेल
दरअसल अमेरिका ने 60 दिनों के लिए प्रतिबंधों में ढील दे दी है, जिसके बाद ईरान एशिया के बड़े तेल खरीदार देशों के साथ संपर्क कर रहा है, कि वो उसका तेल खरीद लें. इन देशों में जापान और साउथ कोरिया के साथ ही भारत का नाम भी शामिल है. ईरान के पास फिलहाल करीब 6.8 करोड़ बैरल कच्चा तेल है, जो समुद्र में टैंकरों पर पड़ा है. इसका ही बड़ा हिस्सा अभी किसी खरीदार के लिए तय नहीं है. ऐसे में ईरान अपना ये तेल बेचने के लिए कोई मोटा खरीदार ढूंढ रहा है.

ये भी पढ़ें: ATF News: फ्लाइट खर्च पर बड़ी राहत, एयरलाइंस हटाएंगी फ्यूल सरचार्ज, कम होंगे टिकट के दाम!

क्या भारत बनेगा खरीदा?
युद्ध के दौरान भारत को जब तेल की जरूरत थी, उस समय ही स्थिति को देखते हुए देश ने अपने लिए इंतजाम कर लिया था. ऐसे में अब ईरान से तेल की खरीदारी में वो कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता है. हालांकि भारत के लिए ईरानी तेल तक पहुंचना आसान है और कुछ टैंकर सिर्फ दो-तीन दिनों में भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं. ये सौदा भले ही फायदे का साबित हो सकता है लेकिन फिर भी भारतीय रिफाइनरीज फिलहाल जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करना चाहती हैं. क्योंकि उन्होंने अगस्त तक के लिए अन्य देशों से तेल की व्यवस्था पहले ही कर रखी है, इसलिए अभी ईरानी तेल की आनन- फानन में कोई जरूरत नहीं है.

ये भी है एक वजह
हालांकि केवल एक ही कारण नहीं है बल्कि अमेरिकी नीति में बार-बार बदलाव भी तेल ना खरीदने का एक कारण है. भारत समेत तमाम देशों को ऐसी आशंका है कि भविष्य में फिर से प्रतिबंध लग सकता है, जिसके चलते ही सभी सतर्क है. बीमा, फाइनेंस और शिपिंग से जुड़ी चुनौतियां भी बनी हुई हैं. ऐसे में कंपनियों का सतर्क रहना बनता भी है.

ये भी पढ़ें: नीति आयोग की रिपोर्ट: बढ़ रहा है देश का व्यापार, लेकिन इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट का असंतुलन बना बड़ी चुनौती

ऐसे हो सकती है डील
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट का मानना है कि अगर प्रतिबंधों में मिली राहत लंबे समय तक कायम रहती है, तो चीन सबसे पहले ईरानी तेल बड़ी मात्रा खरीदेगा. तो वहीं भारत दूसरे चरण में यानी अगस्त के बाद या इसी महीने में ईरान से तेल खरीद सकता है. खासतौर से तब जब ईरान कोई आकर्षक छूट दे या कोई अच्छी डील करे. रिपोर्ट्स का ये भी कहना है कि भारत और ईरान के बीच केवल कच्चे तेल की डील ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एलपीजी, पेट्रोकेमिकल्स, उर्वरक और ऊर्जा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने की संभावना है.



Source link