सरकार ने संसद में बताया बैंक फ्रॉड का डरावना सच, 5 साल में डूबे 1.42 लाख करोड़, कितनी हुई रिकवर

सरकार ने संसद में बताया बैंक फ्रॉड का डरावना सच, 5 साल में डूबे 1.42 लाख करोड़, कितनी हुई रिकवर


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  • संसद में 1.42 लाख करोड़ बैंक धोखाधड़ी का खुलासा हुआ.
  • इन धोखाधड़ी में केवल 4.5% (6,389 करोड़) की वसूली हुई.
  • यह जानकारी RBI के आंकड़ों पर आधारित; वसूली सतत प्रक्रिया.
  • सार्वजनिक बैंकों ने डिफाल्टरों के खिलाफ कानूनी वसूली कदम उठाए.

Bank Fraud News: देश के बैंकिंग सेक्टर को लेकर संसद में एक बहुत ही चौंकानेवाला खुलासा हुआ है. बीते मंगलवार को संसद में वित्त मंत्रालय की तरफ से पेश आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच सालों में देश के बैंकों में 1.42 लाख करोड़ से अधिक (1,42,112 करोड़ रुपये) की धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं. इनमें से केवल 4.5% (6389 रुपये) की ही रिकवरी हो पाई है.

राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि ये आंकड़े रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से मिली जानकारी पर आधारित हैं. इस डेटा में कमर्शियल बैंक पब्लिक सेक्टर बैंक (PSB), प्राइवेट सेक्टर बैंक, विदेशी बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक, लोकल एरिया बैंक और ऑल-इंडिया फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस शामिल हैं.

रिकवरी पर और क्या बोली सरकार?

बैंक धोखाधड़ी की कुल रकम और रिकवर की गई राशि के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि जिन अकाउंट्स से फ्रॉड हुए हैं उनसे रकम की रिकवरी लगातार की जाती रहती है.

RBI के आंकड़ों के मुताबिक, बैंकों ने पिछले पांच फाइनेंशियल वर्षों में ऐसे धोखाधड़ी वाले खातों से कुल 6,389 करोड़ रुपये रिकवर किए हैं. जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों (विलफुल डिफॉल्टर्स) के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में मंत्री ने कहा कि RBI ऐसे कर्जदारों के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई की जानकारी नहीं रखता है. हालांकि, पब्लिक सेक्टर के बैंकों से मिली जानकारी के आधार पर, 31 मार्च, 2026 तक कानूनी और रिकवरी से जुड़े अहम कदम उठाए गए हैं.

बैंकों ने की तगड़ी कार्रवाई

सरकार ने बताया कि पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSB) ने जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों (wilful defaulters) के खिलाफ 15,577 रिकवरी केस दायर किए हैं. इसके अलावा, 10,894 मामलों में SARFAESI एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू की गई है, जबकि जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों के खिलाफ 7,173 FIR दर्ज की गई हैं. 

रिकवरी इतनी कम क्यों?

किसी बड़े फ्रॉड को पहचानने और उसे धोखाधड़ी घोषित करने में बैंकों को अमूमन 2-5 साल का वक्त लग जाता है. इस देरी का फायदा उठाते हुए आरोपी या तो फंड को शेल कंपनियों के नेटवर्क में ट्रांसफर कर देते हैं या विदेशी बैंकों में भेज देते हैं. या फिर फ्रॉड के पैसों से बेनामी संपत्तिया या क्रिप्टोकरेंसी खरीद ली जाती है. ऊपर से लंबी कानूनी प्रक्रियाओं, सालों से चलने वाले मुकदमे और अकाउंट फ्रीज करने या संपत्तियों की बिक्री में देरी भी ऐसी वजहें, जिनके चलते रिकवरी की रफ्तार धीमी रहती है और पूरे पैसे वापस भी नहीं मिल पाते हैं.

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