Gold-Silver News: सोने और चांदी की कीमतों में पिछले कुछ समय में काफी उतार- चढ़ाव देखा गया है. ना केवल कीमतों में बल्कि इम्पोर्ट ड्यूटी में भी काफी बदलाव देखे गए हैं. जिससे कभी कारोबारियों को फायदा हुआ, तो कभी नुकसान की स्थिति भी बनी. तो वहीं ग्राहकों का हल भी कुछ ऐसा ही रहा है. इसी बीच अब एक बार फिर से सरकार ने सोने- चांदी के आयात पर एक बड़ा फैसला किया है, जिससे ज्वेलरी बाजार और ग्राहकों दोनों को थोड़ी राहत मिल सकती है.
क्या है सरकार का नया फैसला?
दरअसल केंद्र सरकार ने हाल ही में सोने और चांदी की बेस इम्पोर्ट प्राइस (Base Import Price) में कटौती कर दी है. सरकार ने सोने के बेस इम्पोर्ट प्राइस 51 डॉलर (भारतीय रुपये के अनुसार करीब 4 हजार 851 रुपये) घटाकर 1,297 डॉलर (भारतीय रुपये के मुताबिक 1 लाख 23 हजार 381 रुपये) प्रति 10 ग्राम और चांदी की बेस इम्पोर्ट प्राइस 22 डॉलर (भारतीय रुपये के अनुसार करीब 2 हजार 092 रुपये) घटाकर 1,875 डॉलर (भारतीय रुपये के मुताबिक करीब 1 लाख 78 हजार 365 रुपये) प्रति किलोग्राम कर दी है.
ये भी पढ़ें: EPS 2026: सरकार ने लागू की नई पेंशन योजना, जानें नई EPFO स्कीम में क्या बदला और क्या नहीं
क्या होता है बेस इम्पोर्ट प्राइस?
बेस इम्पोर्ट प्राइस वो कीमत होती है, जिसके आधार पर आयातित सोने और चांदी पर सीमा शुल्क (Custom Duty) की गणना की जाती है. सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुसार इसमें बदलाव करती है. ऐसा ही बदलाव हाल ही में एक बार फिर से सरकार ने किया है, जिससे कारोबारियों और ग्राहकों दोनों को राहत मिल सकती है.
खुदरा व्यापार पर क्या पड़ेगा असर?
सरकार के इस फैसले से आयातकों और ज्वेलरी कारोबारियों की ड्यूटी लागत कुछ हद तक कम होगी. इससे सोना और चांदी आयात करना पहले के मुताबिक सस्ता पड़ेगा, जिससे सोने- चांदी के गहने बेचने वाले कारोबारियों यानी ज्वेलर्स की लागत और मार्जिन में भी काफी फर्क पड़ेगा. अगर अंतरराष्ट्रीय कीमतें और डॉलर-रुपया विनिमय दर स्थिर रहती हैं, तो इसका कुछ लाभ ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है.
ये भी पढ़ें: Prism IPO: OYO की पेरेंट कंपनी Prism लाएगी 6650 करोड़ का IPO, जानिए क्या है कंपनी का गेमप्लान
सोने- चांदी की कीमतें होंगी कम?
सरकार के इस फैसले से आम ग्राहकों को भी सोने- चांदी पर राहत मिल सकती है. वो ऐसे कि हो सकता है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी के आभूषणों तथा बुलियन की कीमतों पर भी कुछ राहत मिल सके. हालांकि, ये राहत सीमित हो सकती है क्योंकि आखिरी कीमत कई और भी चीजें पर निर्भर करती है.






