- राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (17 जुलाई, 2026) को यौन उत्पीड़न के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई की. याचिका में आसाराम के स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की मांग की गई है, जिस पर सुनवाई के दौरान देश के सर्वोच्च अदालत ने राजस्थान की सरकार को दोषी आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति से कोर्ट को अवगत कराने का निर्देश दिया है.
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने राजस्थान सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, ‘हम नहीं चाहते हैं कि बाद में दोष हमारे या आपके सिर पर आए.’
20 जुलाई तक सरकार एफिडेविट फाइल कर देगी- मेहता
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि डॉक्टरों का कहना है कि यौन उत्पीड़न मामले के दोषी ठहराए गए आसाराम को अपने स्वास्थ्य समस्याओं को मैनेज करने के लिए लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करने की जरूरत है. इस पर बेंच ने कहा, ‘हम नहीं चाहते हैं कि कोई अप्रिय घटना घटे.’ इस पर मेहता को कोर्ट को आश्वस्त किया कि राजस्थान सरकार सोमवार (20 जुलाई, 2026) तक इस संबंध में एफिडेविट फाइल कर देगी.
राजस्थान हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत, तो SC का खटखटाया दरवाजा
दरअसल, राजस्थान हाई कोर्ट ने भी 27 मई को हुई सुनवाई के बाद साल 2013 में एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न मामले में आसाराम को दोषी मानते हुए उसकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था. इसके बाद दोषी आसाराम ने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ अपना रुख किया. सुप्रीम कोर्ट में यह मामला जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया.
सुनवाई के दौरान दोषी आसाराम के वकील ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘गैस्ट्रो से जुड़े समस्या की वजह से कुछ ब्लीडिंग हो रही है, लेकिन यह अस्थायी दिक्कत नजर आती है, उन्हें दवाइयां दी जा रही हैं.’ इस पर बेंच ने कहा, ‘हम सिर्फ इतना कह रहे हैं कि उचित निर्देश लेकर आइए, क्योंकि हम नहीं चाहते हैं कि कोई अप्रिय घटना घटे.’ जबकि दोषी आसाराम की तरफ से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल एक हाई-रिस्क पेशेंट हैं.
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