हरिद्वार, आगामी कुंभ मेले की भव्य तैयारियों और वार्षिक रखरखाव को देखते हुए हरिद्वार में ऊपरी गंगा नहर (गंग नहर) का संचालन 20 अक्टूबर की मध्यरात्रि से अस्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा. सिंचाई विभाग के अनुसार, यह नहरबंदी 8 नवंबर की मध्यरात्रि तक जारी रहेगी. इस दौरान नहर की मरम्मत, सफाई और घाटों के निर्माण कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा किया जाएगा.
यदि आप इस दौरान हरिद्वार दर्शन या गंगा स्नान की योजना बना रहे हैं, अथवा पश्चिमी उत्तर प्रदेश या दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं, तो यह खबर आपके लिए जानना बेहद जरूरी है.
8 नवंबर तक चलेगा मरम्मत और सफाई अभियान
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग हर साल दिवाली और दशहरे के आसपास गंग नहर की वार्षिक बंदी करता है. इस बार आगामी कुंभ मेले के आयोजनों को देखते हुए यह बंदी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
सिंचाई विभाग के एसडीओ भारत भूषण ने बताया कि स्नान पर्वों और हाल ही में संपन्न हुए कांवड़ मेले के दौरान भारी मात्रा में कचरा, लकड़ियां, पूजन सामग्री और कांवड़ सामग्री नहर में जमा हो जाती है. पानी का प्रवाह रुकने के बाद पूरी नहर से इस मलबे और गाद (सिल्ट) की सफाई की जाएगी. इसके साथ ही नहर की दीवारों, पुलों और रेगुलेटरों की जरूरी मरम्मत भी पूरी की जाएगी.
कुंभ मेले से जुड़े निर्माण कार्यों को मिलेगी रफ्तार
कुंभ मेले के लिए हरिद्वार में गंगा घाटों के विस्तार, नए पुलों और सुरक्षा से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है. पानी के तेज बहाव में नहर के भीतर निर्माण कार्य करना संभव नहीं होता. ऐसे में 19 दिनों की यह नहरबंदी विभिन्न सरकारी विभागों के लिए निर्माण कार्यों को तेज गति से पूरा करने का बेहतरीन मौका साबित होगी. प्रशासन का लक्ष्य है कि तय समयसीमा के भीतर घाटों के सुदृढ़ीकरण का काम निपटा लिया जाए.
हरकी पैड़ी पर स्नान के लिए मिलेगा गंगाजल
अक्सर नहर बंद होने की खबर से हरिद्वार आने वाले तीर्थयात्रियों के मन में सवाल उठता है कि क्या वे स्नान कर पाएंगे?
इस पर एसडीओ भारत भूषण ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं को बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है. नहरबंदी के बावजूद हरकी पैड़ी के प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की आस्था का पूरा ध्यान रखा जाएगा और वहां स्नान के लिए पर्याप्त गंगाजल की उपलब्धता सुनिश्चित रहेगी. हालांकि, हरिद्वार से आगे डाउनस्ट्रीम (निचले इलाकों) में पानी के स्तर में गिरावट देखने को मिल सकती है.
यूपी और दिल्ली-एनसीआर में पेयजल व सिंचाई का क्या होगा?
ऊपरी गंगा नहर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 15 प्रमुख जनपदों में खेतों की सिंचाई का मुख्य स्रोत है. इसके अलावा, दिल्ली-एनसीआर समेत 7 जिलों के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स को पेयजल आपूर्ति भी इसी नहर से की जाती है.
अधिकारियों के मुताबिक, आम जनता और किसानों को पानी की किल्लत न हो, इसके लिए पहले से पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है:
- जल भंडारण: नहरबंदी लागू होने से पहले ही सभी संबंधित जलाशयों और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स के स्टोरेज टैंकों को पूरी क्षमता से भर लिया गया है.
- वैकल्पिक व्यवस्था: सिंचाई और पेयजल की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थानीय ट्यूबवेल और अन्य वैकल्पिक स्रोतों को सक्रिय रखा जाएगा.
प्रशासन का कहना है कि 8 नवंबर की मध्यरात्रि को कार्य पूरा होते ही नहर में तय शेड्यूल के अनुसार दोबारा पानी छोड़ दिया जाएगा.
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