ईरान ने परमाणु ऊर्जा संगठन के पूर्व अधिकारी की दी फांसी, इजरायल के लिए जासूसी करने का था आरोप

ईरान ने परमाणु ऊर्जा संगठन के पूर्व अधिकारी की दी फांसी, इजरायल के लिए जासूसी करने का था आरोप


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  • ईरान ने इजरायल के लिए जासूसी के आरोप में मेहदी फरीद को फांसी दी।
  • फरीद रक्षा मंत्रालय में संवेदनशील पदों पर, मोसाद से संपर्क में था।
  • उस पर परमाणु ऊर्जा संगठन की जानकारी साझा करने का आरोप था।
  • फरीद ने सुनवाई में मोसाद तक जानकारी पहुंचाने की बात कबूल की थी।

ईरान ने बुधवार (22 अप्रैल, 2026) को तड़के सुबह एक शख्स को फांसी दे दी, जिसे इजरायल के लिए जासूसी करने का दोषी ठहराया गया था. देश की न्यायपालिका ने शख्स की पहचान मेहदी फरीद के रूप में की. कोर्ट ने यह भी कहा कि दोषी मेहदी फरीद ने इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के अधिकारियों के साथ ऑनलाइन संपर्क बनाए रखा था.

ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी न्यायपालिका ने कहा कि फरीद देश के एक संवेदनशील संगठन में एक गैर-सैन्य रक्षा प्रबंधन समिति के प्रशासनिक विभाग का प्रमुख था. हालांकि, संगठन के नाम को सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन दोषी पर संगठनात्मक ढांचे, सुरक्षा व्यवस्थाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़ी जानकारी साझा करने का आरोप था.

ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन में काम करता था फरीद

रिपोर्ट के मुताबिक, मानवाधिकार समूहों ने कहा कि फरीद को साल 2023 में गिरफ्तार किया गया था और वह ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन में काम करता था. फरीद को पहले राजधानी तेहरान की ग्रेटन तेहरान जेल में रखा गया था, इसके बाद उसे एविन जेल में शिफ्ट कर दिया गया.

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ईरान ह्यूमन राइट्स ने पिछले साल एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसके तहत फरीद को शुरुआत में 10 साल की सजा सुनाई गई थी और बाद में पुनर्विचार के बाद इजरायल के मोसाद के लिए जासूसी करने के आरोप में मौत की सजा दी गई.

फरीद ने कोर्ट में मोसाद तक जानकारी पहुंचाने की बात कबूली

ईरान के कोर्ट ने कहा कि फरीद ने इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के एक अधिकारी के निर्देश पर इंटरनल सर्वरों को इंफेक्टेड फाइलों के साथ जोड़ा और USB डिवाइस के जरिए सिस्टम तक बाहरी पहुंच को मुमकिन कर दिया था. यह भी कहा गया कि फरीद ने मामले की सुनवाई के दौरान ईरान से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को मोसाद तक पहुंचाने की बात कबूल की थी और उसे इसके बदले में पैसे के साथ देश से बाहर निकलने में मदद का वादा किया गया था. हालांकि, मानवाधिकार समूहों ने ईरान में जबरन कबूलनामों और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई है.

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