Ekadashi Vrat 2026: एकादशी व्रत का हिंदू धर्म में बड़ा माहात्म्य है. हर महीने चंद्र पखवाड़े का ग्यारहवां दिन एकादशी तिथि कहलाता है. हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की 11वीं तिथि को एकादशी व्रत रखने का विधान है. अलग-अलग महीने और पक्ष में पड़ने वाली एकादशी के नाम और महत्व में भी अंतर होता है.
फिलहाल वैशाख का महीना चल रहा है और वैशाख शुक्ल पक्ष की 11वीं तिथि सोमवार 27 अप्रैल 2026 को पड़ रही है. इसे मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi) के नाम से जाना जाता है, जिसमें भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार की पूजा होती है. इसी तरह अलग-अलग माह और पक्ष में अलग-अलग एकादशी व्रत पड़ते हैं.
एकादशी व्रत तो कई लोग रखते हैं और इसके नियमों का पालन भी करते हैं. एकादशी का व्रत पूर्ण रखें या आंशिक सभी तरह से रखा जा सकता है. लेकिन एकादशी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है निष्ठा और भगवान विष्णु की पूजा. लेकिन आज भी बहुत से लोग एकादशी का असली अर्थ नहीं जानते हैं. अगर आपको भी एकादशी का अर्थ नहीं पता तो यहां जानें मतलब.
99% लोग नहीं जानते एकादशी का अर्थ
कई लोग एकादशी का अर्थ तिथि या व्रत को मानते हैं, जबकि ऐसा नहीं है. एकादशी का सही अर्थ इससे भिन्न है. वैदिक संस्कृति में प्राचीन काल से ही योगी और ऋषि इंद्रिय क्रियाओं को भौतिकवाद से देवत्व की ओर मोड़ने का महत्व देते रहे हैं. एकादशी व्रत भी उसी साधना में से एक है. हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार, एकादशी में दो शब्द होते हैं एक का मतलब है (1) और दशा का अर्थ है (10). यानी दस इंद्रियों और मन की क्रियाओं को सांसारिक वस्तुओं से ईश्वर में बदलने का अर्थ ही एकादशी है.
एकादशी का अर्थ है कि हमें अपनी 10 इंद्रियों और 1 मन को (5 ज्ञानेंद्रियों+ 5 कर्मेंद्रियां+ 1 मन= 11) नियंत्रित करना चाहिए. मन में काम, क्रोध, लोभ आदि के कुविचार नहीं आने देने चाहिए. एकादशी एक तपस्या की तरह है, जो केवल भगवान को महसूस करने और प्रसन्न करने के लिए ही किया जाना चाहिए.
99% लोग कहां करते हैं गलती
अधिकांश लोग एकादशी व्रत को दो पहलुओं तक सीमित कर देते हैं, जिसमें कुछ ना खाना यानी निर्जला व्रत और दूसरा फलाहार व्रत है. एकादशी के दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखने के बाद लोग दिनभर सामान्य गतिविधियों जैसे- गुस्सा, क्रोध, नकारात्मक विचार आदि में लगे रखते हैं, जो सही नहीं है. व्रत रखने के बाद भी अगर आपका मन अशांत है, क्रोध और ईर्ष्या बनी है, तो व्रत का 1 प्रतिशत फल नहीं मिलता.
इस प्रकार एकादशी का अर्थ है कि, यह व्रत सिर्फ शरीर को भूखा रखने का नहीं, बल्कि मन और इंद्रियों को भी संयमित करने का है और यही इसका असली उद्देश्य है.
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