भारत इस साल BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है. 2026 में होने वाला 18वां BRICS सम्मेलन भारत में आयोजित होगा. इस बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है. अगर ऐसा होता है तो एक बार फिर रूस, भारत और चीन के नेताओं को एक मंच पर देखा जाएगा, जिसे वैश्विक राजनीति में काफी अहम माना जा रहा है.
इससे पहले 28 अप्रैल 2026 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की रक्षा मंत्रियों की बैठक हुई थी. इस दौरान भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस और चीन के रक्षा मंत्रियों से अलग-अलग मुलाकात की थी. इन बैठकों में भारत और चीन ने सीमा विवाद को संभालने और तनाव कम करने पर सहमति जताई थी. इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की उम्मीद बढ़ी है.
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भारत और रूस के बीच मजबूत रक्षा संबंध
भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत रक्षा संबंध रहे हैं. रूस भारत को लड़ाकू विमान, मिसाइल और पनडुब्बियां देता रहा है. अब दोनों देश रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन और भारत में निर्माण पर भी काम कर रहे हैं. वहीं चीन के साथ 2020 के पूर्वी लद्दाख विवाद के बाद संबंधों में तनाव था, लेकिन अब बातचीत के जरिए हालात सामान्य करने की कोशिश हो रही है. SCO मंच पर भारत, रूस और चीन के नेता एक साथ दिखाई दिए थे, तब दुनिया भर की नजर इस तिकड़ी पर गई थी. अब BRICS सम्मेलन में भी ऐसी तस्वीर सामने आने की संभावना जताई जा रही है. रूसी राष्ट्रपति पुतिन के भारत आने का कार्यक्रम लगभग तय माना जा रहा है, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दौरे को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी नहीं आई है. माना जा रहा है कि अगर वे भारत आते हैं तो यह सात साल बाद उनका भारत दौरा होगा.
भारत की स्वतंत्र विदेश नीति
भारत के लिए यह स्थिति रणनीतिक संतुलन की नीति को दिखाती है. भारत एक तरफ रूस के साथ अपने पुराने संबंध बनाए हुए है तो दूसरी तरफ चीन के साथ भी बातचीत जारी रखे हुए है. यही भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और मल्टी-अलाइनमेंट रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. BRICS के जरिए भारत, रूस और चीन स्थानीय मुद्रा में व्यापार, नया पेमेंट सिस्टम और डॉलर पर निर्भरता कम करने जैसे कदमों पर भी चर्चा कर रहे हैं. इसका असर अमेरिका की वैश्विक रणनीति पर पड़ सकता है.
पाकिस्तान के लिए टेंशन की बात
BRICS की बढ़ती नजदीकी पाकिस्तान के लिए भी चिंता का कारण बन सकती है. पाकिस्तान लंबे समय से चीन को अपना सबसे करीबी सहयोगी मानता रहा है, लेकिन अगर चीन भारत के साथ रिश्ते बेहतर करने की दिशा में आगे बढ़ता है तो पाकिस्तान की स्थिति कमजोर पड़ सकती है. वहीं BRICS और SCO जैसे मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका पाकिस्तान को क्षेत्रीय स्तर पर और अलग-थलग कर सकती है. अगर BRICS 2026 सम्मेलन में भारत, रूस और चीन के नेताओं की अलग बैठक होती है तो यह दुनिया को एक बड़ा राजनीतिक संदेश देगा कि अब वैश्विक शक्ति संतुलन केवल अमेरिका केंद्रित नहीं रह गया है.
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