Hajj Yatra 2026: इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने जिलहिज्जा (Dhulhijjah) की शुरुआत सऊदी अरब में 18 मई और भारत में 19 मई से हो चुकी है. इसे बहुत ही बरकतों वाला महीना माना जाता है. जिलहिज्जा के पाक महीने में दो अहम इबादते हैं- एक हज और दूसरा कुर्बानी.
हज इस्लाम का चौथा रुक्न (आधार) है. हज सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में की जाने वाली पवित्र धार्मिक तीर्थयात्रा है, जो ऐसे सभी मुसलमानों के लिए फर्ज (अनिवार्य) है, जो इसे वहन कर सकते हैं. इस्लाम के अनुसार, शारीरिक और आर्थिक रूप से जो मुसलमान सक्षम हैं उन्हें अपने जीवन में कम-से-कम एक बार पवित्र शहर मक्का की तीर्थयात्रा करनी चाहिए.
पवित्र आध्यात्मिक यात्रा हज पैगंबर इब्राहिम, उनकी पत्नी हाजर और उनके बेटे इस्माइल की भक्ति का स्मरण कराती है. हज ऐसा इबादत है जो विनम्रता, एकता, पश्चाताप और अल्लाह के प्रति समर्पण पर बल देता है.
कब शुरू होगी हज 2026
सऊदी अरब में जिलहिज्जा का चांद नजर आने के साथ ही हज यात्रा की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. हज यात्रा हर साल जिलहिज्जा के दौरान की जाती है. इस्लामिक चंद्र कैलेंडर के अनुसार यह जिलहिज्जा की 8वीं से 13वीं तारीख के बीच होती है. इस साल हज 25 मई 2026 से शुरू होगी. इस दिन हज यात्री अपने-अपने स्थानों से मीना के लिए रवाना होंगे.
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हज यात्रा: यात्री से हाजी कहलाने तक का सफर
हज यात्री मीना- 25 मई को मीना पहुंचने के बाद यहां बने खेमों में ठहरकर यात्री 5 वक्त की नमाज जुहर, अस्र, मगरिब, इशा और फज्र की नमाज अदा करेंगे. इस तरह दुआ और इबादत के साथ मीना में समय बिताया जाता है.
अराफात- मीना में फज्र की नमाज के बाद हज यात्री 26 मई के बाद अराफात के मैदान के लिए रवाना होंगे. यह हज यात्रा का अहम दिन होता है. यहां हज यात्री जुहर और अस्र की नमाज एक साथ अदा करेंगे.
मुजदलिफा- अराफात के बाद हज यात्री मुजदलिफा पहुंचकर मगरिब और इशा की नमाज एक साथ अदा करेंगे और खुले मैदान में रात बिताएंगे. यहां यात्री शैतान को मारने वाली कंकड़ियां चुनते हैं.
जमरात- 27 मई को हज यात्री जमरात पहुंचेंगे और यहां बड़े शैतान को सात कंकड़ी मारते हैं. इसके साथ कुर्बानी की रस्म पूरी होती है. इसके बाद यात्री नए कपड़े पहनकर खाना-ए-काबा में तवाफ-ए-जियारत अदा करते हैं और सफा-मरवा के सात चक्कर लगाते हैं. इसके बाद हज की प्रकिया पूरी हो जाती है और यात्री हाजी कहलाते हैं.
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