Arvind Panagariya Appeal to RBI: 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष और भारत-अमेरिका के अर्थशास्त्री अरविंद पनगारिया ने रुपये की गिरती कीमत पर अपनी बात रखी है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक से जरूरी अपील की है. उन्होंने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक 100 रुपए प्रति डॉलर की मानसिकता के साथ अपनी पॉलिसी तय न करने दें. 100 सिर्फ संख्या है. जैसे 99 और 101. तेल की कमी चाहे कम समय के लिए हो या लंबे समय के लिए, ऐसे में इस समय सही कदम यह है कि रुपए को गिरने दिया जाए.
उन्होंने कहा कि तेल की कमी कम समय के लिए हैं. 3 महीने से एक साल तक. ऐसे में रुपया गिरेगा. इससे तेल का इम्पोर्ट बिल कम होगा, विदेशी पूंजी सस्ते रुपये का फायदा उठाने के लिए भारतीय निवेश की ओर रूख करेगी. रुपया काफी हद तक संभल जाएगा.
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तेल की कमी लंबे समय तक रहने वाली है: पनगारिया
वहीं, उन्होंने कहा है कि तेल की कमी लंबे समय तक रहने वाली है. रुपये को गिरने देने के अलावा कोई भी उपाय घाटे का सौदा ही होगा. रुपये को बचाने की कोशिश में रिजर्व तबतक लगातार घटते रहेंगे, जबतक वह पूरी तरह खत्म नहीं हो जाते हैं.
इसके अलावा उन्होंने कहा कि न ही डॉलर में जारी किए गए बॉन्ड या ज्यादा ब्याज वाले एनआरआई डॉलर जमा किसी मरहम से ज्यादा कुछ साबित होंगे. ऐसे में रुपये की 100 प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार करना ही पड़ेगा.
पनगारिया का कहना है कि साल 2013 में महंगाई डबल डिजीट नंबर में थी. लेकिन समझदारी से मॉनिटरी मैनेजमेंट की बदौलत अब ऐसी स्थिति नहीं है. इसलिए हमारी अर्थव्यवस्था रुपये के गिरने से पैदा होने वाले महंगाई के प्रेशर को झेलने के लिए पूरी तरह तैयार है. साथ ही उन्होंने कहा है कि बॉन्ड और ज्यादा ब्याज वाले एनआरआई डॉलर जमा किए जाएं. ये महंगे साधन है. इन पर भारत को अपने विदेशी मुद्रा भंडार पर मिलने वाले ब्याज की तुलना में काफी ज्यादा ब्याज देना पड़ता है. मुख्य रूप से यह अमीर एनआरआई को पैसे का ट्रांसफर है.
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