Cocoa Farming Tips: चॉकलेट खाना किसे पसंद नहीं होता, बच्चे हो या बड़े, हर कोई इसके स्वाद का दीवाना है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस चॉकलेट को आप बड़े चाव से खाते हैं. उसकी खेती से यानी कोको फार्मिंग से किसान भाई अपनी किस्मत चमका सकते हैं. कोको के पौधों से जो बीन्स मिलते हैं, उसी से दुनिया भर की चॉकलेट्स और कोको पाउडर तैयार किया जाता है.
आजकल ग्लोबल मार्केट के साथ-साथ भारत में भी चॉकलेट की डिमांड बहुत तेजी से बढ़ रही है, जिसकी वजह से कोको की खेती किसानों के लिए एक बंपर कमाई वाला बिजनेस आइडिया बन चुकी है. अगर आप भी लीक से हटकर कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं और अपनी रेगुलर इनकम को कई गुना बढ़ाना चाहते हैं. तो कोको की खेती आपके लिए बेस्ट ऑप्शन है. चलिए जानते हैं इसे शुरू करने का पूरा प्रोसेस.
ऐसे तैयार करें कोको का बाग
कोको की खेती के लिए थोड़ा गर्म और नमी वाला मौसम सबसे बेस्ट माना जाता है. इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे तेज धूप से बचाने की जरूरत होती है. इसलिए किसान भाई इसकी खेती मिक्स्ड क्रॉपिंग यानी सह-फसल के तौर पर कर सकते हैं. आप इसे अपने नारियल या सुपारी के बागों के बीच में जो खाली जगह होती है. वहां आसानी से उगा सकते हैं.
ऐसा करने से कोको के पौधों को जरूरी छाया भी मिल जाती है और एक ही जमीन से आपको डबल मुनाफा होने लगता है. इसके पौधों को लगाने के लिए अच्छे जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी की जरूरत होती है. शुरुआत में नर्सरी से अच्छे और एडवांस वैरायटी के पौधे खरीदकर आप अपने इस प्रॉफिटेबल सफर की शुरुआत बहुत ही कम लागत में कर सकते हैं.
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चॉकलेट के बीन्स से होगी छप्परफाड़ कमाई
कोको का पौधा लगाने के बाद लगभग तीन से चार साल में इसमें फल आने शुरू हो जाते हैं, जिन्हें कोको पॉड्स कहा जाता है. जब ये पॉड्स पककर पीले या नारंगी रंग के हो जाते हैं. तब इनकी हार्वेस्टिंग की जाती है. इन पॉड्स के अंदर से जो बीन्स निकलते हैं. उन्हें धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है. पूरी तरह सूखने के बाद ये बीन्स बड़ी-बड़ी चॉकलेट कंपनियों को बेहद महंगे दामों पर बेच दिए जाते हैं.
कोको के पेड़ों की लाइफ लगभग 30 से 40 साल तक होती है. जिसका मतलब है कि एक बार की गई छोटी सी मेहनत आपको दशकों तक रेगुलर और मोटी कमाई देती रहेगी. कम लागत, कम रिस्क और लाइफटाइम प्रॉफिट की वजह से ही आज किसान कोको फार्मिंग की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं.
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