Adhik Masik Durgashtami 2026: पंचांग (Panchang) के अनुसार, हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी के रूप में मनाया जाता है. यह तिथि देवी दुर्गा की पूजा के लिए समर्पित होती है. लेकिन इस महीने की मासिक दुर्गाष्टमी कई मायनों में खास रहने वाली है, क्योंकि अधिकमास लगने के कारण मई में अधिक मासिक दुर्गाष्टमी का संयोग बन रहा है.
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ मास में अधिकमास या पुरुषोत्तम मास का संयोग बना है. इस महीने पड़ने वाले व्रत, त्योहार और पर्व धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं. अधिकमास के पर्व का संयोग तीन वर्षों में एक बार बनता है, जिससे कि इसकी महत्ता काफी बढ़ जाती है. बता दें कि अधिकमास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा और इस दौरान पड़ने वाले त्योहार ज्येष्ठ अधिकमास में आएंगे. जानें ज्येष्ठ अधिकमास की मासिक दुर्गाष्टमी कब है.
23 या 24 मई अधिक मासिक दुर्गाष्टमी कब (Adhik Maas Durgashtami 2026 Date)
द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 23 मई सुबह 05:04 से लग जाएगी और 24 मई सुबह 04:27 तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार, अधिक मासिक दुर्गाष्टमी शनिवार, 23 मई को मनाई जाएगी.
मासिक दुर्गाष्टमी पर रहेंगे ये शुभ मुहूर्त (23 May 2026 Shubh Muhurat)
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 4:04 बजे से 4:45 बजे तक |
| अभिजीत मुहूर्त | सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 2:35 बजे से 3:30 बजे तक |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 7:08 बजे से 7:29 बजे तक |
| अमृत काल | रात 11:45 बजे से 1:21 बजे तक |
मासिक दुर्गाष्टमी पूजा विधि (Masik Durga Ashtami Puja Vidhi)
दुर्गाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि के बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा की तैयारी करें. पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर मां दुर्गा की प्रतिमा या फोटो स्थापित करें और घी का दीपक जलाएं. देवी दुर्गा को लाल फूल, सिंदूर, कुमकुम, लाल चुनरी, श्रृंगार का सामान चढ़ाएं. इस दिन पंचामृत, फल, मिठाई आदि का भोग लगा सकते हैं. पूजा में कथा, दुर्गा चीलास और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना लाभकारी होता है. आप मां दुर्गा के मंत्रों का जाप भी कर सकते हैं. पूजा पूरी होने के बाद माता रानी आरती करें.
मां दुर्गा के मंत्र (Maa Durga Mantra)
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोःस्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि॥
ॐ दुं दुर्गायै नमः॥
मासिक दुर्गाष्टमी पर क्या करें क्या नहीं
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.






