एक ही सफ़ में खड़े हो गए महमूदो-अयाज़,
न कोई बंदा रहा और न कोई बंदा-नवाज़…
अल्लामा इकबाल का यह मशहूर शेर आज मक्का की धरती पर सच होता दिखाई दे रहा है. सफेद एहराम में लिपटे लाखों मुसलमान… किसी की पहचान नहीं, कोई अमीर-गरीब नहीं… बस हर तरफ एक ही आवाज गूंज रही है ‘लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक…’
आज से दुनिया की सबसे बड़ी आध्यात्मिक यात्राओं में शामिल हज (Hajj) की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है. सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में इस वक्त ऐसा दृश्य दिखाई दे रहा है, जिसे देखकर करोड़ों लोग भावुक हो रहे हैं.
इस्लामी कैलेंडर के 8वें ज़िलहिज्जा को हज का पहला दिन माना जाता है, जिसे ‘यौम-ए-तरवियाह’ कहा जाता है. इसी दिन लाखों हाजी मक्का से मीना की ओर रवाना होते हैं. इस बार भीषण गर्मी और 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचते तापमान के बीच लाखों लोग इबादत के इस सफर में शामिल हुए हैं. सोशल मीडिया पर हज 2026 की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं. कहीं बुजुर्ग हाजी रोते हुए नजर आ रहे हैं, तो कहीं पिता अपने बच्चों के साथ दुआ करते दिखाई दे रहे हैं.
आखिर हज इतना खास क्यों माना जाता है?
इस्लाम में हज को पांच स्तंभों में शामिल किया गया है. हर उस मुसलमान पर जीवन में कम से कम एक बार हज करना फर्ज माना गया है, जो शारीरिक और आर्थिक रूप से सक्षम हो. लेकिन हज केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मा को बदल देने वाला अनुभव माना जाता है.
हज का सबसे बड़ा संदेश है समानता. यहां राजा और मजदूर, अरब और गैर-अरब, अमीर और गरीब सभी एक जैसे सफेद एहराम में नजर आते हैं. न कोई बड़ा होता है और न छोटा. यही वजह है कि हज को दुनिया का सबसे बड़ा spiritual gathering भी कहा जाता है.
इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से किया गया हज इंसान को गुनाहों से ऐसे पाक कर देता है जैसे वह नवजात शिशु हो. यही कारण है कि दुनिया भर के मुसलमान वर्षों तक पैसे बचाकर इस यात्रा का सपना देखते हैं.
हज के पहले दिन मीना क्यों जाते हैं हाजी?
हज के पहले दिन श्रद्धालु मक्का से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित मीना पहुंचते हैं. मीना को ‘City of Tents’ भी कहा जाता है, क्योंकि यहां लाखों लोगों के लिए सफेद टेंट लगाए जाते हैं. दूर से देखने पर यह पूरा इलाका सफेद समंदर जैसा दिखाई देता है.
इस दिन हाजी पांचों वक्त की नमाज अदा करते हैं, कुरान पढ़ते हैं और अल्लाह से दुआ मांगते हैं. माना जाता है कि यह दिन इंसान को दुनियावी भागदौड़ से अलग होकर आत्ममंथन का अवसर देता है. इस दौरान लोग अपने जीवन, गलतियों और भविष्य को लेकर गहराई से सोचते हैं.
हज से जुड़ी वह परंपरा जो आज भी लोगों को भावुक कर देती है
हज का संबंध पैगंबर इब्राहिम अलैहिस्सलाम, बीबी हाजरा और पैगंबर इस्माइल की कुर्बानी और सब्र से जुड़ा माना जाता है. इस यात्रा का हर पड़ाव त्याग, भरोसे और अल्लाह के प्रति समर्पण की कहानी सुनाता है.
मीना के बाद 9 ज़िलहिज्जा को हाजी अराफात के मैदान पहुंचते हैं. इसे हज का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है. इस दिन लाखों लोग एक साथ हाथ उठाकर दुआ करते हैं. इसके बाद मुज़दलिफा में रात बिताई जाती है और फिर ‘रमी अल-जमरात’ यानी शैतान को कंकरी मारने की रस्म अदा की जाती है.
Heatwave और AI Technology के बीच हो रहा है हज 2026
इस बार हज केवल आध्यात्मिक कारणों से ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और extreme heat की वजह से भी चर्चा में है. सऊदी अरब प्रशासन ने भीषण गर्मी को देखते हुए AI based crowd management system, स्मार्ट कैमरे, मेडिकल कैंप और ठंडे पानी की विशेष व्यवस्था की है.
हज दुनिया के सबसे बड़े annual gatherings में से एक माना जाता है. लाखों लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था संभालना किसी चुनौती से कम नहीं होता. पिछले वर्षों में गर्मी और भीड़ के कारण कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, इसलिए इस बार टेक्नोलॉजी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
भारत से भी पहुंचे हजारों हाजी
भारत से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु हज यात्रा पर पहुंचे हैं. दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, हैदराबाद, श्रीनगर और अन्य शहरों से विशेष हज फ्लाइट्स संचालित की गईं. कई भारतीय हाजियों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना था.
कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने वर्षों तक पैसे बचाकर यह यात्रा पूरी की. सोशल मीडिया पर एक बुजुर्ग दंपति की तस्वीर वायरल हो रही है, जिन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई पूरी होने के बाद पहली बार हज का सफर तय किया.
हज का सबसे बड़ा संदेश क्या है?
आज मक्का में लाखों लोग मौजूद हैं, लेकिन वहां किसी की पहचान उसके कपड़ों, दौलत या पद से नहीं हो रही. हर व्यक्ति सिर्फ एक बंदे की तरह अपने रब के सामने खड़ा है. शायद यही हज का सबसे बड़ा संदेश भी है… इंसानियत, बराबरी, सब्र और समर्पण.
FAQs
हज का पहला दिन क्या कहलाता है?
हज के पहले दिन को यौम-ए-तरवियाह कहा जाता है.
हाजी मीना क्यों जाते हैं?
मीना में हाजी नमाज, दुआ और इबादत के साथ हज के अगले चरणों की तैयारी करते हैं.
हज इस्लाम में क्यों महत्वपूर्ण है?
हज इस्लाम के पांच स्तंभों में शामिल है और हर सक्षम मुसलमान पर जीवन में एक बार फर्ज माना गया है.
लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है, मैं हाजिर हूं ऐ अल्लाह, मैं हाजिर हूं.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.






