Adhik Maas Shivratri 2026: एक दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर….. क्या आप जानते हैं कि 13 जून 2026 को आने वाली यह शिवरात्रि सामान्य दिनों से हजार गुना अधिक फलदायी क्यों है? पूरे 3 साल के लंबे इंतजार के बाद इस बार ‘अधिक मास’ में महादेव और भगवान विष्णु की संयुक्त कृपा धरती पर बरसने वाली है, जिसे सनातन शास्त्रों में ‘हरि-हर’ संगम का नाम दिया गया है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, इस विशेष दिन ग्रहों की स्थिति इतनी चमत्कारी है जो कुंडली के सबसे भयंकर ‘विष दोष’ और चंद्रमा की कमजोरी को भी शुभता में बदल सकती है.
याद रहे, इस महासंयोग का पूरा पुण्य फल तभी मिलेगा जब आप घर पर या मंदिर में पवित्र मिट्टी से शिवलिंग बनाकर उनका पूजन सही विधि और कड़े नियमों के साथ करेंगे. अगर आप लंबे समय से मानसिक तनाव, राहु-केतु की अंतर्दशा या शनि की साढ़ेसाती-ढैय्या से परेशान हैं, तो 13 जून को ‘ॐ नमः शिवाय’ महामंत्र के साथ किया गया यह छोटा सा पंचामृत अभिषेक आपकी बंद किस्मत के दरवाजे खोल सकता है.
आइए जानते हैं इस विशेष शिवरात्रि पर पार्थिव (मिट्टी के) शिवलिंग की पूजा का महत्व, ज्योतिषीय लाभ, व्रत के नियम और स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि.
अधिक मास शिवरात्रि 2026
- पर्व का नाम: अधिक मास मासिक शिवरात्रि 2026
- मुख्य महीना: जून 2026 (धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है)
- तिथि का महत्व: अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि
- मुख्य अनुष्ठान: पवित्र मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करना और विधि-विधान से उनका पंचामृत अभिषेक करना
- विशेष योग: इस दिन ‘हरि-हर’ का महासंयोग बन रहा है, जिससे सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु और संहारक भगवान शिव का संयुक्त आशीर्वाद बरसता है
वैज्ञानिक और ज्योतिषीय कारण: हर 3 साल में क्यों आता है अधिक मास?
पाठकों को पूरी और तथ्यात्मक जानकारी देने के लिए इसके पीछे का गणित समझना जरूरी है:
- सौर वर्ष (Solar Year): सूर्य पर आधारित कैलेंडर में एक वर्ष लगभग 365 दिन और 6 घंटे का होता है.
- चंद्र वर्ष (Lunar Year): चंद्रमा पर आधारित कैलेंडर में एक वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है.
समाधान: इन दोनों वर्षों के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है. इसी अंतर को पाटने और सौर-चंद्र कैलेंडरों में संतुलन बनाए रखने के लिए हर तीसरे साल (32 महीने, 16 दिन और 4 घटी के बाद) 1 अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है. इसे ही अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं.
इस महीने के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) हैं और शिवरात्रि तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं, इसलिए इस दिन ‘हरि-हर’ का संयुक्त आशीर्वाद सीधे पृथ्वी पर बरसता है.
पार्थिव शिवलिंग पूजा का महत्व: क्यों जरूरी है मिट्टी का शिवलिंग?
शिव महापुराण के अनुसार, अधिक मास की शिवरात्रि के दिन मिट्टी से शिवलिंग (Parthiv Shivling Puja) बनाकर उनका विधि-विधान से पूजन करने का विशेष फल है:
मानसिक और शारीरिक आरोग्यता: मान्यता है कि पवित्र मिट्टी से निर्मित शिवलिंग की पूजा और जलाभिषेक करने से पुराने से पुराने शारीरिक कष्ट और मानसिक तनाव दूर होते हैं. यह व्रत व्यक्ति की संकल्पशक्ति को मजबूत करता है.
शीघ्र विवाह के योग: शास्त्रों के अनुसार, यदि कुंवारी कन्याएं इस दिन पूरी निष्ठा के साथ पार्थिव शिवलिंग का पूजन करती हैं, तो उनके विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है.
ज्योतिषीय लाभ: राहु-केतु, शनि दोष और विष दोष से मुक्ति
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जून 2026 में आने वाली यह शिवरात्रि ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को शांत करने का एक अचूक और दुर्लभ अवसर है:
राहु-केतु और शनि की शांति: आपकी कुंडली में राहु-केतु की स्थिति खराब है, या आप शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से पीड़ित हैं, तो इस दिन प्रदोष काल में शिव पूजा करने से कष्टों से भारी राहत मिलती है.
चंद्रमा की मजबूती (विष दोष निवारण): कुंडली में चंद्रमा की कमजोरी से बनने वाले ‘विष दोष’ के प्रभाव को कम करने में भी यह दिन कारगर माना गया है. आर्थिक तंगी या व्यापारिक नुकसान से जूझ रहे लोगों के लिए भी यह दिन सौभाग्य लेकर आता है.
शास्त्रों के अनुसार व्रत के नियम: क्या करें और क्या न करें?
गूगल की पॉलिसी के अनुसार, धार्मिक लेखों में सही आचरण की गाइडलाइन देना आवश्यक है:
मांगलिक कार्य वर्जित: यह मलमास (अधिक मास) का समय होता है, इसलिए इस पूरे महीने में विवाह, मुंडन, जनेऊ, या गृह प्रवेश जैसे कोई भी नए मांगलिक और शुभ कार्य पूरी तरह वर्जित होते हैं.
आचरण की शुद्धता: व्रत के दौरान किसी का भी अपमान न करें और न ही कटु वचनों का प्रयोग करें. इस दिन क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचकर ध्यान (Meditation) और योग करना सर्वोत्तम फल देता है.
प्रामाणिक और सरल पूजा विधि
आप इस महासंयोग का पूरा पुण्य लाभ उठाना चाहते हैं, तो शास्त्रों में बताई गई इस प्रामाणिक विधि का पालन करें:
(FAQs)
प्रश्न: क्या अधिक मास में नियमित पूजा-पाठ वर्जित होती है?
उत्तर: नहीं, अधिक मास में केवल नए मांगलिक कार्य (जैसे शादी, नया घर खरीदना) वर्जित होते हैं. नियमित पूजा, व्रत, दान-पुण्य और भगवान विष्णु-शिव की आराधना का इस महीने में सामान्य से कई गुना अधिक फल मिलता है.
प्रश्न: पार्थिव शिवलिंग की पूजा के बाद मिट्टी का क्या करना चाहिए?
उत्तर: पूजा और आरती संपन्न होने के अगले दिन, पार्थिव शिवलिंग को पूरे सम्मान के साथ किसी पवित्र नदी, तालाब में विसर्जित कर देना चाहिए या घर के ही किसी गमले की साफ मिट्टी में विलीन कर देना चाहिए.
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