Maharana Pratap Jayanti 2026: हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार, महाराणा प्रताप का जन्म विक्रम सम्वत 1597 में ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर हुआ था, इसके अनुसार महाराणा की जयंती 17 जून को मनाई जाएगी. हालांकि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, हर साल 9 मई को ही महाराणा प्रताप की जयंती मनाई जाती है.
मेवाड़ के महान राजपूत राजा महाराणा प्रताप का नाम भारत के उन वीरों में लिया जाता है जिन्होंने देश को मुगलों से बचाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी थी. महाराणा प्रताप का इतिहास, उनकी जयंती कैसे मनाई जाती है, क्या है इस दिन का महत्व.
देश के वीर सपूत
महाराणा प्रताप के अदम्य साहस, जिजीविषा और कभी हार न मानने वाले रवैये की वजह से उन्हें भारतीय इतिहास में सम्मानपूर्वक देखा और पढ़ा जाता है. आज भी महाराणा प्रताप का जिक्र समस्त भारतीयों के लिए गर्व का विषय है. महाराणा प्रताप बचपन से ही बहादुर, स्वाभिमानी तथा धार्मिक आचरण की विशेषता इनमें थी. महाराणा प्रताप ने देश की की आन के अपना समस्त जीवन लगा दिया. महाराणा प्रताप की जयंती राजस्थान, हरियाणा में धूमधाम से मनाई जाती है.
महाराणा प्रताप का इतिहास
महाराणा प्रताप उदय सिंह द्वितीय और जयवंता बाई के सबसे बड़े पुत्र थे जिन्हें उदयपुर का संस्थापक माना जाता है. उन्हें चाहने वाले ही नहीं बल्कि दुश्मन भी उनकी सैन्य क्षमता का लोहा मानते थे. प्रताप दृढ संकल्पी, युद्ध में कौशल, अच्छे राजनीतिज्ञ, आदर्श संगठनकर्ता तथा प्रजा के हृदय पर शासन करने वाले शासक थे.
हल्दीघाटी का युद्ध
महाराणा प्रताप ने अपने राज्य की रक्षा हेतु मुगल सम्राट अकबर के विरुद्ध हल्दीघाटी का भीषण युद्ध लड़ा था. अकबर चाहता था कि मेवाड़ भी मुगल साम्राज्य की अधीनता स्वीकार कर ले, लेकिन महाराणा प्रताप ने स्वतंत्रता से समझौता करने से इनकार कर दिया. इसी कारण दोनों पक्षों के बीच संघर्ष हुआ.
हल्दीघाटी का युद्ध भारतीय इतिहास में वीरता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है. महाराणा प्रताप का संघर्ष आज भी राष्ट्रभक्ति और आत्मसम्मान की प्रेरणा देता है.
महाराणा प्रताप का सबसे वफादार साथी था चेतक
चेतक महाराणा प्रताप का प्रिय और अत्यंत वफादार घोड़ा था. माना जाता है कि चेतक मारवाड़ी नस्ल का नीले रंग की आभा वाला शक्तिशाली घोड़ा था. उसकी फुर्ती, साहस और स्वामिभक्ति की कहानियां आज भी राजस्थान के लोकगीतों में सुनाई देती हैं. चेतक केवल एक घोड़ा नहीं था, बल्कि महाराणा प्रताप का सबसे भरोसेमंद साथी था. उसकी निष्ठा और बलिदान ने उसे भारतीय इतिहास में अमर बना दिया.
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