देश के 197 जिलों के लिए आफत बनेगा अल नीनो, ऐसे बचाएं अपना खेत?

देश के 197 जिलों के लिए आफत बनेगा अल नीनो, ऐसे बचाएं अपना खेत?


El Nino Farm Safety Tips: इस साल देश के किसानों के लिए मानसून की राह थोड़ी पथरीली होने वाली है क्योंकि अल नीनो का साया हमारे खेतों पर मंडराने लगा है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक सरकार इस खतरे को लेकर पूरी तरह अलर्ट मोड पर है और देश के 197 जिलों को सबसे संवेदनशील यानी हाई-रिस्क जोन के रूप में चुना गया है. 

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने अनुमान लगाया है कि इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम यानी लगभग 90 फीसदी ही रह सकता है. ऐसे में अगर मानसून के दूसरे फेज में अल नीनो का असर बढ़ा, तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है. इस बड़ी चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर खास तैयारियां शुरू कर दी हैं जिससे किसानों के खेतों और उनकी मेहनत को सूखा होने से बचाया जा सके.

क्या है 197 जिलों का पूरा प्लान?

अल नीनो की इस टेंशन को देखते हुए कृषि मंत्रालय हर हफ्ते हाई-लेवल समीक्षा बैठकें कर रहा है ताकि सिचुएशन पर 24 घंटे नजर रखी जा सके. सरकार ने इन 197 संवेदनशील जिलों के लिए खास तौर पर कंटीजेंसी प्लान यानी आकस्मिक योजनाएं तैयार की हैं. किसी भी आपात स्थिति या सूखे जैसे हालात से निपटने के लिए जरूरी बीजों और दूसरी कृषि सामग्रियों का पर्याप्त स्टॉक पहले से ही जमा कर लिया गया है. 

इसके साथ ही ग्राउंड लेवल पर किसानों को इस मौसम के मिजाज से निपटने के लिए जागरूक करने के मकसद से देशभर में एक बड़ा खेत बचाओ अभियान चलाया जा रहा है. मानसून 4 जून को केरल पहुंच चुका है और 15 जुलाई तक इसके पूरे देश में छाने की उम्मीद है इसलिए प्रशासन अलर्ट पर है.

यह भी पढ़ें: गर्मियों में भैंसों के लिए वरदान हैं ये घरेलू उपाय, लू और हीट स्ट्रोक से मिलेगी तुरंत राहत

किसान भाई अपने खेत को ऐसे रखें सुरक्षित

जब अल नीनो के कारण बारिश कम होने का खतरा हो तो किसानों को अपनी खेती के तौर-तरीकों में थोड़ा मॉडर्न और स्मार्ट बदलाव करना होगा. इस मुश्किल वक्त में अपने खेतों की नमी बचाए रखने के लिए आप मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं. जिसमें जमीन को सूखी पत्तियों या प्लास्टिक से ढका जाता है. पानी की भारी बर्बादी को रोकने के लिए ड्रिप इरिगेशन या स्प्रिंकलर सिंचाई सबसे बेस्ट ऑप्शन साबित होंगे.

इसके अलावा कृषि वैज्ञानिकों की सलाह मानकर कम पानी में तैयार होने वाली और कम समय लेने वाली फसलों की वैरायटी को ही प्राथमिकता दें. सरकार के खेत बचाओ अभियान से जुड़कर मौसम और बीजों की सही जानकारी लगातार लेते रहें ताकि वक्त रहते अपनी फसलों का बचाव किया जा सके.

यह भी पढ़ें: हल्दी, अदरक या धनिया… कम बारिश में कौन सा मसाला देगा ज्यादा मुनाफा?



Source link