इस तकनीक से करेंगे धान की बुआई तो 60% कम हो जाएगी मजदूरी, पानी भी बचेगा 

इस तकनीक से करेंगे धान की बुआई तो 60% कम हो जाएगी मजदूरी, पानी भी बचेगा 


Drum Seeder Technique: धान खरीफ के सीजन की सबसे ज्यादा खेती की जाने वाली फसल मानी जाती है. हर साल लाखों किसान धान की खेती करते हैं, लेकिन इसकी रोपाई किसानों के लिए सबसे ज्यादा खर्चीली और मेहनत भरी प्रक्रिया बन जाती है. पहले नर्सरी तैयार करनी पड़ती है, फिर बिचड़ा उखाड़ कर खेतों में रोपाई करनी होती है. इस पूरी प्रक्रिया में मजदूर, ज्यादा पानी और समय की जरूरत पड़ती है. ऐसे में बढ़ती मजदूरी और बदलते मौसम के बीच किसान अब ऐसी तकनीक अपना रहे हैं, जो लागत कम करने के साथ उत्पादन भी बेहतर बनाता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि अगर आप कौन सी तकनीक से धान की बुवाई करेंगे तो 60 प्रतिशत तक मजदूरी कम हो जाएगी और पानी भी बचेगा. 

ड्रम सीडर तकनीक से होगा फायदा 

ड्रम सीडर एक हल्का कृषि यंत्र है, जिसमें प्लास्टिक के ड्रम लगे होते हैं. इन ड्रमों में अंकुरित धान के बीज भरे जाते हैं. जब मशीन को खेत में चलाया जाता है तो बीज निश्चित दूरी पर कतारों में गिरते जाते हैं. इससे पौधों के बीच समान दूरी बनी रहती है और फसल का विकास बेहतर तरीके से होता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि कतार में बुवाई होने से पौधों को प्राप्त दूरी पर हवा और पोषण भी मिलता है, जिससे फसल अच्छी तरह से बढ़ती है और उत्पादन भी अच्छा होता है. 

ड्रम सीडर से बुवाई के लिए ऐसे तैयार करें खेत 

ड्रम सीडर से बुवाई करने के लिए खेत को समतल और भुरभुरा होना जरूरी है. खेत में बड़े ढेले या गहरे गड्ढे नहीं होने चाहिए. ताकि बीज समान गहराई पर गिर सके. इसके लिए खेत की अच्छी जुताई और समतलीकरण करना चाहिए. बुवाई के समय खेत में लगभग 1 से 2 सेंटीमीटर पानी होना चाहिए, साथ ही खरपतवारों को पहले ही हटा देना चाहिए, ताकि पौधों के बीच पोषक तत्व की कमी न हो. 

अंकुरित बीजों से होती है बुवाई 

ड्रम सीडर तकनीक में धान के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों को पहले 24 घंटे पानी में भिगोया जाता है. इसके बाद 24 से 36 घंटे तक उन्हें अंकुरित होने दिया जाता है. अंकुरित बीजों को मशीन के ड्रम में भरकर खेत में सीधी दिशा में चलाया जाता है. सामान्य तौर पर कतार से कतार की दूरी लगभग 20 सेंटीमीटर रखी जाती है. बुवाई के बाद शुरुआती 2 से 3 दिनों तक खेत में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए. 

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ड्रम सीडर से मजदूरी और पानी की होती है बचत 

ड्रम सीडर तकनीक का सबसे बड़ा फायदा मजदूरी की लागत होती है. कृषि एक्सपर्ट्स के अनुसार पहले की तरह रोपाई की तुलना में इस तकनीक से 50 से 60 फीसदी तक मजदूरी कम लगती है. जहां सालों से हो रही रोपाई तकनीक में बड़ी संख्या में मजदूरों की जरूरत पड़ती है. वहीं ड्रम सीडर की मदद से एक व्यक्ति अकेले ही एक दिन में लगभग 3 एकड़ तक धान की बुवाई कर सकता है. वहीं धान की पारंपरिक खेती में खेत में लगातार पानी भरा रखना पड़ता है, जिससे सिंचाई पर काफी खर्च आता है, लेकिन ड्रम सीडर तकनीक में लगातार पानी की आवश्यकता नहीं होती. एक्सपर्ट्स के अनुसार इस तकनीक को अपनाकर किसान 20 से 30 प्रतिशत सिंचाई जल की बचत कर सकते हैं. वहीं ड्रम सीडर से बुवाई करने पर बीज की मात्रा भी कम लगती है. 

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