किसानों को सताया ‘अल नीनो’ का डर, तेलंगाना में बारिश के लिए निभा रहे ‘बथुकम्मा’ रस्म

किसानों को सताया ‘अल नीनो’ का डर, तेलंगाना में बारिश के लिए निभा रहे ‘बथुकम्मा’ रस्म


El Nino Effect in India: बारिश के देवता को खुश करने की कोशिश में तेलंगाना के राजन्ना सिरसिल्ला ज़िले के इल्लंथाकुंटा गांव में खेतिहर मज़दूरों और किसानों ने अपने खेती के औज़ारों के आस-पास पारंपरिक ‘बथुकम्मा’ रस्म का आयोजन किया. मॉनसून की बारिश में देरी और ‘अल नीनो’ के असर से बुवाई का काम पूरी तरह रुकने और उनकी रोज़ी-रोटी छिनने का खतरा मंडरा रहा है.

राज्य में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का मौसम आधिकारिक तौर पर आ चुका है, लेकिन आसमान ज़्यादातर साफ़ है, जिससे पूरा किसान समुदाय गहरी चिंता में है. स्थानीय खेतिहर मज़दूर, जो अपनी बुनियादी ज़रूरतों के लिए रोज़ाना खेतों में काम करने पर निर्भर हैं, ने दैवीय मदद पाने के लिए अपने पुरखों के तरीकों को अपनाने का फ़ैसला किया. अपना रोज का काम पूरा करने के बाद, मजदूर गांव के बीच में इकट्ठा हुए. उन्होंने अपने हल, फावड़े, दरांती और खेती के दूसरे पारंपरिक औज़ारों को एक घेरे में रखा और उन्हें पूरे सम्मान के साथ पूजा.

बारिश न होने से रोजगार छिनने का डर

इसमें शामिल लोगों ने पारंपरिक लोक गीत गाए और भगवान वरुण से इस इलाके में भरपूर और समय पर बारिश करने की ज़ोरदार अपील की. एक स्थानीय खेतिहर मज़दूर ने समुदाय की सामूहिक परेशानी ज़ाहिर करते हुए कहा कि वे खेतों में काम करते हैं और अगर बारिश नहीं हुई, तो उनका रोज़ का रोज़गार पूरी तरह खत्म हो जाएगा. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना काम खत्म करने के बाद शाम को यह पारंपरिक प्रार्थना आयोजित की, जिसमें उन्होंने अपने पुरखों से मिली पवित्र परंपराओं का पूरी तरह पालन किया. यह रस्म सिर्फ़ सांस्कृतिक अभिव्यक्ति नहीं थी, बल्कि आर्थिक रूप से ज़िंदा रहने की एक मार्मिक गुहार भी थी.

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अल नीनों ने बिगाड़ा बारिश का चक्र

‘अल नीनो’ मौसम पैटर्न के कारण खेती-बाड़ी की स्थिति बहुत खराब हो गई है. मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि पूरे इलाके में बारिश का सामान्य चक्र बिगड़ गया है. किसानों को गहरी चिंता है कि बारिश न होने से वे अपनी मुख्य फ़सलों की बुवाई नहीं कर पाएंगे, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होगा. पूरी तरह सूखे खेत उनकी बढ़ती निराशा और बेबसी की गवाही दे रहे हैं. मिट्टी में पर्याप्त नमी न होने के कारण ट्रैक्टरों से ज़मीन तैयार नहीं हो पा रही है और पिछले कुछ हफ़्तों में हाथ से काम करने के मौके भी काफ़ी कम हो गए हैं.

खरीफ की फसल पर पड़ सकता है असर

स्थानीय मंडल कृषि अधिकारी सुरेश कुमार ने माना कि मौसम की खराब स्थिति बुवाई के मौसम पर असर डाल रही है. उन्होंने कहा कि लंबे समय से चल रहे सूखे का असर मौजूदा खरीफ़ फ़सल चक्र की योजना पर बुरी तरह पड़ रहा है और अधिकारी जलाशयों के जलस्तर पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं. इस बीच, मज़दूर और किसान अब पूरी तरह से दैवीय मदद पर निर्भर हैं. उन्हें उम्मीद है कि उनके पारंपरिक रीति-रिवाज़ों से बहुत ज़रूरी बारिश होगी, जिससे उनकी फ़सलें बच सकेंगी और आने वाले महीनों के लिए उनका रोज़गार सुरक्षित हो सकेगा.

रिपोर्ट: शेख मोहसिन

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