भारत को नहीं मिलेगा Mythos का एक्सेस, ट्रंप सरकार के नए आदेश में भी राहत नहीं

भारत को नहीं मिलेगा Mythos का एक्सेस, ट्रंप सरकार के नए आदेश में भी राहत नहीं


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  • ट्रंप राष्ट्रीय सुरक्षा चिंता, Mythos 5 एक्सेस प्रतिबंधित।
  • एंथ्रोपिक विश्वसनीय अमेरिकी कंपनियों को अब एक्सेस देगी।
  • दुरुपयोग की चिंता, सार्वजनिक पहुँच पर प्रतिबंध जारी।

Claude Mythos 5 Access: ट्रंप सरकार ने एंथ्रोपिक के शक्तिशाली एआई मॉडल Mythos 5 पर लगे प्रतिबंधों में कुछ ढील दी है. अमेरिकी सरकार का कहना है कि एंथ्रोपिक कुछ भरोसेमंद अमेरिकी कंपनियों को इसकी एक्सेस दे सकती है. इसका मतलब है कि कंपनी अभी इसे पब्लिक के लिए रोलआउट नहीं कर पाएगी और पहले की तरह भारत समेत अधिकतर दुनिया के लिए इसके एक्सेस पर ताला लटका रहेगा. आइए यह पूरा मामला विस्तार से जानते हैं.

ट्रंप प्रशासन ने लगाई थी एक्सेस पर रोक

कुछ हफ्ते पहले ट्रंप सरकार ने एंथ्रोपिक को आदेश देकर अपने एडवांस्ड एआई मॉडल Mythos 5 और Fable 5 का एक्सेस बंद करने को कहा था. इस आदेश के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को हवाला दिया गया था, लेकिन माना जा रहा है कि इस आदेश के जरिए ट्रंप प्रशासन उन एआई मॉडल्स पर अपना कंट्रोल कड़ा करना चाहता है, जिन्हें दूसरे देशों की सरकारों या साइबर अपराधियों द्वारा मिसयूज किया जा सकता है.

अब किसे मिलेगा एक्सेस?

एंथ्रोपिक ने बताया कि उसे क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रोटेक्ट और ऑपरेट करने वाली कंपनियों के लिए Mythos 5 का एक्सेस रिस्टोर करने की मंजूरी मिल गई है. अब इन कंपनियों के लिए रोलआउट तेज किया जा रहा है. साथ ही कंपनी Mythos 5 और Fable 5 को जनरल यूज के लिए अवेलेबल करवाने पर भी सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सरकार के आदेश के बाद 100 से अधिक कंपनियों को एंथ्रोपिक के इस सबसे शक्तिशाली साइबर सिक्योरिटी मॉडल का एक्सेस मिल जाएगा. इनमें वो कंपनियां भी शामिल हैं, जो एंथ्रोपिक के प्रोजेक्ट ग्लासविंग प्रोग्राम में शामिल थीं.

क्यों लगाया गया था बैन?

अमेरिकी अधिकारियों ने चिंता जताई थी कि पावरफुल एआई मॉडल को चीन और रूस जैसे देशों की मिलिट्री और इंटेलीजेंस एजेंसियां यूज कर सकती हैं. इसके अलावा कई साइबर एक्सपर्ट्स ने भी चेतावनी दी थी कि अगर ये मॉडल गलत हाथों में पड़ जाते हैं तो इनसे साइबर हमले किए जा सकते हैं. हालांकि, अमेरिकी सरकार के इस फैसले पर सवाल भी उठे थे. जानकारों का कहना है कि कोई नहीं जानता है कि अमेरिकी सरकार ने कंपनियों को किस आधार पर इसकी एक्सेस दी और बाकियों को किस आधार पर छोड़ा गया. यह सरकार के हाथ में बहुत ज्यादा पावर देने जैसा है. OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने भी इसकी आलोचना करते हुए कहा था कि सेफ्टी टेस्टिंग बुरी चीज नहीं है, लेकिन सरकार का कस्टमर चुनना ठीक नहीं है.

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