कोलंबो की भारत-पाकिस्तान सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ? विदेश मंत्रालय ने दिया ये हैरान करने वाल

कोलंबो की भारत-पाकिस्तान सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ? विदेश मंत्रालय ने दिया ये हैरान करने वाल


बीते कुछ दिनों से कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में एक अनौपचारिक बैठक ही हुई थी. इसे लेकर भारत सरकार ने कहा कि इसमें कुछ भी नया नहीं है और इसमें कुछ भी आधिकारिक नहीं है. इस तरह की अनौपचारिक बातचीत को ट्रैक-II डायलॉग कहा जाता है, जिसमें सरकार से अलग जैसे रिटायर्ड अधिकारी, साइंटिस्ट या अन्य लोग शामिल होते हैं ताकि बिना किसी राजनीतिक दवाब के दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के रास्ते तलाशे जा सकें.

बैठक में कुछ भी आधिकारिक नहीं: भारत

कोलंबो में भारत-पाकिस्तान के बीच ‘ट्रैक 2’ बातचीत के बारे में पूछे जाने पर विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, ‘मैंने ऐसी खबरें देखी हैं और मुझे इनके बारे में जानकारी है. दुनिया भर में कई जगहों पर अलग-अलग विषयों पर ऐसे दर्जनों कार्यक्रम होते रहते हैं. इन कार्यक्रमों में कुछ भी नया या खास नहीं है. जहां तक हमारी बात है, ये निजी पार्टियों की ओर से आयोजित प्राइवेट कार्यक्रम हैं. हमारी नजर में इनमें कुछ भी आधिकारिक नहीं है.’

हमारे लिए इस बैठक की कोई वैल्यू नहीं: MEA

विदेश सचिव ने कहा, ‘मैं पाकिस्तान सरकार की ओर से तो कुछ नहीं कह सकता, लेकिन भारत सरकार की बात करें तो इन दौरों में कोई आधिकारिक भागीदारी, समर्थन या शामिल होना नहीं है. भारत से जो भी लोग इन कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं- चाहे वे रिटायर्ड राजनयिक हों, रिटायर्ड सैन्य अधिकारी हों या सिविल सोसाइटी के सदस्य हों, वे अपनी बात रखते हैं और अपना नजरिया पेश करते हैं. वे किसी भी तरह से भारत सरकार के नजरिए का प्रतिनिधित्व नहीं करते और न ही कर सकते हैं. हम असल में इन कार्यक्रमों पर कोई ध्यान नहीं देते. हमारी नजर में इनकी कोई खास अहमियत नहीं है.’

कोलंबो में हुई भारत-PAK सीक्रेट मीटिंग: रिपोर्ट

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक कोलंबो के एक होटल में करीब दो दिनों तक चली इस बातचीत में भारत की तरफ से पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे, इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष राम माधव और पूर्व राजनयिक रुचि घनश्याम शामिल हुए. पाकिस्तान की ओर से वहां के विदेश मंत्रालय के अधिकारी सज्जाद हैदर खान, पूर्व राजदूत शेरी रहमान और रिटायर्ड मेजर जनरल इसफंदियाम अली खान पटौदी मौजूद थे. रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस बैठक में सीमा पार आतंकवाद, पानी बंटवारे और भविष्य में सैन्य टकराव को रोकने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी.

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