यूएस सीनेटर बोले- चीन जाते समय फोन छोड़कर जाता हूं, भारत जाते वक्त साथ लेकर जाता हूं, बताई वजह

यूएस सीनेटर बोले- चीन जाते समय फोन छोड़कर जाता हूं, भारत जाते वक्त साथ लेकर जाता हूं, बताई वजह


अमेरिकी सीनेटर स्टीव डेन्स ने मंगलवार (1 जुलाई 2026) को चीन और भारत की अपनी यात्राओं के अनुभव साझा करते हुए दोनों देशों के प्रति अमेरिका के भरोसे का अंतर साफ किया. उन्होंने कहा कि चीन जाते समय वे अपना फोन साथ नहीं ले जाते, जबकि भारत की यात्रा के दौरान फोन हमेशा उनके पास रहता है. वॉशिंगटन में आयोजितयूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फॉरम लीडरशिप समिट में  डेन्स ने कहा कि यह उदाहरण भारत और अमेरिका के बीच मजबूत भरोसे को दिखाता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका को भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी और मजबूत करनी चाहिए, खासकर ऐसे समय में जब चीन से जुड़ी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं.
 
डेन्स ने कहा, जब मैं चीन जाता हूं तो यह फोन लेकर नहीं जाता. यह वॉशिंगटन डीसी में मेरी डेस्क पर ही रहता है,  लेकिन जब मैं दिल्ली या भारत के किसी दूसरे शहर में जाता हूं तो यह फोन मेरे साथ होता है. उनके मुताबिक यह सिर्फ एक उदाहरण नहीं बल्कि भारत और अमेरिका के बीच गहरे विश्वास का संकेत है.

उन्होंने कहा कि अमेरिका चीन से पूरी तरह अलग नहीं हो सकता. इसके बजाय वॉशिंगटन को ऐसी रणनीति अपनानी चाहिए जिसमें भरोसेमंद देशों के साथ संबंध मजबूत किए जाएं और जोखिम कम किए जाएं. डेन्स के अनुसार इस रणनीति में भारत की भूमिका बेहद अहम है.

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भारत को लेकर इनोवेशन और आर्थिक स्तर का जिक्र

सीनेटर ने कहा कि दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है जो अमेरिका के साथ मिलकर चीन के इनोवेशन और आर्थिक स्तर की बराबरी कर सकता है. उन्होंने कहा कि ग्लोबल स्तर पर चीन को संतुलित करने के लिए भारत-अमेरिका साझेदारी सबसे मजबूत और व्यावहारिक विकल्प है.

राज सुब्रमण्यम के साथ बातचीत के दौरान डेन्स ने कहा कि अमेरिका में चीन से मिलने वाली चुनौतियों पर तो काफी चर्चा होती है, लेकिन इस पर कम ध्यान दिया जाता है कि इन चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए किन साझेदारियों को मजबूत करना जरूरी है.

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और अमेरिका का रिश्ता सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है. उनके अनुसार आने वाले समय में यह साझेदारी वैश्विक शक्ति संतुलन तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.

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