Pro-Tray Technology For Farming: खेती में अब धीरे-धीरे पारंपरिक तरीकों की जगह आधुनिक तकनीक ले रही है. पहले जहां बीज बोकर लंबे समय तक फसल के अंकुरण और बढ़वार का इंतजार करना पड़ता था. वहीं अब प्रो-ट्रे तकनीक किसानों के लिए फायदे वाली साबित हो रही है. इस तकनीक से किसान सीधे तैयार पौधे खेत में लगा रहे हैं.
जिससे न सिर्फ समय बच रहा है बल्कि उत्पादन की क्वालिटी भी बेहतर हो रही है. इस तकनीक को अपनाकर सब्जी उत्पादन का पूरा तरीका ही बदल दिया है. इससे कम समय में ज्यादा और बेहतर फसल ली जा सकती है. जान लीजिए कैसे इस्तेमाल होती है यह तकनीक.
प्रो-ट्रे तकनीक से कैसे तैयार होते हैं मजबूत पौधे?
प्रो-ट्रे तकनीक में बीज को सीधे खेत में बोने के बजाय छोटे-छोटे ट्रे में तैयार किया जाता है. इसमें नारियल के बुरादे यानी कोकोपीट और जैविक खाद का इस्तेमाल किया जाता है. जिससे पौधों को शुरुआती पोषण आसानी से मिल जाता है.
करीब 21 दिनों के अंदर ही पूरी तरह स्वस्थ और वायरस मुक्त पौधे तैयार हो जाते हैं. खास बात यह है कि पॉलीहाउस में तैयार होने के कारण इन पौधों पर मौसम, तेज बारिश या कीटों का कोई खास असर नहीं पड़ता.
इन सब्जियों में होता है फायदा
इस तकनीक से शिमला मिर्च, बैंगन और टमाटर जैसी सब्जियां बहुत तेजी से तैयार होती हैं. जबकि खीरा और करेला जैसे पौधे भी सिर्फ तीन हफ्तों में रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं. इससे किसानों को मजबूत शुरुआत मिलती है और फसल की सफलता की संभावना बढ़ जाती है.
यह भी पढ़ें: इस राज्य में 15 अगस्त तक मछली नहीं पकड़ सकेंगे मछुआरे, सरकार देगी 50 हजार रुपये
समय और लागत दोनों में बड़ी बचत
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा समय की बचत है. जहां पारंपरिक खेती में फसल को तैयार होने में लगभग तीन महीने लग जाते हैं, वहीं प्रो-ट्रे तकनीक से यही फसल करीब दो महीने में ही उत्पादन देने लगती है. इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ता है. क्योंकि जल्दी फसल आने से बाजार में जल्दी बिक्री शुरू हो जाती है.
मुनाफा भी तेजी से बढ़ता है
इस तकनीक से खेती की लागत लगभग आधी हो जाती है. क्योंकि बीज की बर्बादी कम होती है और देखभाल भी नियंत्रित माहौल में होती है. इसके अलावा पौधों की गुणवत्ता बेहतर होने से नुकसान की संभावना भी घट जाती है. यही वजह है कि अब धीरे-धीरे किसान इस आधुनिक तरीके की ओर बढ़ रहे हैं और इसे खेती का भविष्य माना जा रहा है.
यह भी पढ़ें: कैसे तैयार करें खुशबूदार बासमती चावल की पौध? यह है नर्सरी तैयार करने का सही वक्त






